Q.81
‘प्रस्थानत्रयी’ से क्या तात्पर्य है ?
- (A)
वेद, उपनिषद्, गीता
- (B)
उपनिषद्, गीता, ब्राह्मण
- (C)
उपनिषद्, गीता, ब्रह्मसूत्र
- (D)
वेद, उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र
150 सवाल · पेज 5/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.81
‘प्रस्थानत्रयी’ से क्या तात्पर्य है ?
वेद, उपनिषद्, गीता
उपनिषद्, गीता, ब्राह्मण
उपनिषद्, गीता, ब्रह्मसूत्र
वेद, उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र
Q.82
उपनिषदों के अनुसार ‘ब्रह्म’ के लिए ‘तज्जलान्’ शब्द का प्रयोग हुआ है, जिसका तात्पर्य है :
ब्रह्म ही परम सत् है ।
ब्रह्म सत्, सर्वव्यापी, शुद्ध चैतन्यस्वरूप और अनंत है ।
ब्रह्म से ही सूर्य, चन्द्रमा आदि प्रकाशित होते हैं ।
ब्रह्म ही जगत् की उत्पत्ति, अस्तित्व और संहार (लय) का कारण है ।
Q.83
राजस्थान में लोकायुक्त निम्न में से किस कार्य की जाँच नहीं कर सकता है?
अनुशासनात्मक कार्यवाही
भ्रष्टाचार
पद का दुरुपयोग
अकर्मण्यता
Q.84
बौद्ध दर्शन के अष्टांग मार्ग के अनुसार निम्न में से कौन से सम्बन्धित हैं ?
1. सम्यक् दृष्टि
2. सम्यक् संकल्प
3. सम्यक् वाक्
4. सम्यक् दर्शन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
1, 2 तथा 4
2, 3 तथा 4
1, 3 तथा 4
1, 2 तथा 3
Q.85
“संसार में दुःख की व्यापकता निर्विवाद है” - इस विचार का समर्थन कौन सा दर्शन करता है ?
जैन दर्शन
बौद्ध दर्शन
सुकरात दर्शन
गाँधी दर्शन
Q.86
जैन ‘त्रिरत्न’ हैं :
भगवान महावीर, श्रमण तथा श्रावक
अणुव्रत, महाव्रत तथा शिक्षाव्रत
स्याद्वाद, नयवाद तथा अनेकान्तवाद
सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान तथा सम्यक् चरित्र
Q.87
वेदों के बारे में सत्य कथन है :
1. वेद अनादि और अपौरुषेय हैं ।
2. वेद के लिए सबसे प्रचलित शब्द श्रुति है ।
3. वेद का सर्वमान्य अर्थ ‘संगीत’ है ।
4. वेद का सर्वमान्य अर्थ ‘ज्ञान’ है ।
सही उत्तर चुनिए :
1, 2 व 4 सत्य हैं ।
1, 2 व 3 सत्य हैं ।
2, 3 व 4 सत्य हैं ।
1, 3 व 4 सत्य हैं ।
Q.88
‘मैं सोचता हूँ अतः मैं हूँ’ सम्बन्धित है
सुकरात से
बेन्थम से
काण्ट से
देकार्त से
Q.89
सुकरात के अनुसार, सद्गुण है -
अप्राप्य
एक
स्वर्णिम माध्य
सापेक्षिक
Q.90
परिणाम-निरपेक्षवादी नीतिशास्त्र महत्त्व देता है
सुख को
कर्तव्य को
परिणाम को
वैराग्य को
Q.91
वैदिक ‘ऋणत्रयी’ में सम्मिलित नहीं है -
देव ऋण
लोक ऋण
पितृ ऋण
ऋषि ऋण
Q.92
आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत का समर्थन करता है :
दण्ड का प्रतिरोधात्मक सिद्धान्त
दण्ड का प्रतिकारात्मक सिद्धान्त
दण्ड का सुधारात्मक सिद्धान्त
दण्ड का कोई भी सिद्धान्त नहीं
Q.93
सुखों में गुणात्मक भेद स्वीकार्य है, सुखवादी
जे.एस. मिल को
बेन्थम को
सुकरात को
काण्ट को
Q.94
गांधी दर्शन के अनुसार ईश्वर विषयक सर्वाधिक उपयुक्त विचार है -
सत्य ही ईश्वर है।
ईश्वर तटस्थ है।
ईश्वर व्यक्तित्वपूर्ण है।
ईश्वर अप्रासंगिक है।
Q.95
नैतिक सिद्धान्त ‘कर्तव्य के लिए कर्तव्य’ सम्बन्धित है :
देकार्ते से
काण्ट से
मिल से
सुकरात से
Q.96
संकल्प स्वातंत्र्य की अनिवार्य शर्तों में क्या शामिल है ?
1. कर्म करने की क्षमता
2. ज्ञान और उद्देश्य
3. न्याय का आचरण
4. विकल्पों की उपस्थिति
सही उत्तर चुनिए :
1, 2 व 4
2, 3 व 4
1, 2 व 3
1, 3 व 4
Q.97
काण्ट का कठोरवाद समर्थन करता है -
चाहिए में कर सकना निहित है का
अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम हित का
सुखवादी नीतिशास्त्र का
करुणावादी नीतिशास्त्र का
Q.98
सुकरात संदेहवादी नहीं हैं क्योंकि :
उनके दर्शन का अन्त संदेह में होता है।
वे ईश्वर में दृढ़ विश्वास करते हैं।
संदेह, असंदिग्ध सत्य तक पहुँचने का साधन है।
अनुभववादी दर्शन का प्रारम्भ इनके दर्शन से होता है।
Q.99
निम्न में से ऋग्वेद के किस मण्डल में ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति अग्निं यमं ….’ का उल्लेख मिलता है?
प्रथम
तृतीय
आठवाँ
नवाँ
Q.100
बौद्ध धर्म में संघ प्रवेश को क्या कहा जाता था?
पातिमोक्ख
उपसम्पदा
प्रव्रज्या
उपोसथ