Q.81
वेदों का भाग नहीं माने गये हैं
- (A)
मन्त्र
- (B)
ब्राह्मण
- (C)
आरण्यक
- (D)
धर्म-सूत्र
150 सवाल · पेज 5/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.81
वेदों का भाग नहीं माने गये हैं
मन्त्र
ब्राह्मण
आरण्यक
धर्म-सूत्र
Q.82
‘तत् त्वम असि’ का अभिप्राय है
‘आत्मा एक जड़ द्रव्य है’।
आत्मा और ब्रह्म में अभेद है।
आत्मा अन्ततोगत्वा असत् है।
कुछ भी स्वतः सत्तामान नहीं है।
Q.83
भगवद्गीता का नीतिशास्त्र मूलतः है :
परिणामनिरपेक्षवादी
सुखवादी
प्रयोजनवादी
उपयोगितावादी
Q.84
भगवद्गीता सम्मत आदर्श है
अर्हंत
स्थितप्रज्ञ
बोधिसत्त्व
तीर्थंकर
Q.85
जैन स्यादवाद सिद्धान्त के अनुसार
साधारण निर्णय अपूर्ण होते हैं और वस्तु का पक्ष विशेष ही प्रस्तुत करते हैं।
साधारण निर्णय सत्य से नितांत रहित होते हैं।
साधारण निर्णय संशयवाद अभिव्यक्त करते हैं।
ज्ञान संभव नहीं है।
Q.86
जैन दर्शन के अनुसार, ‘निर्जरा’ है
कर्मों का जीव की ओर आकर्षण
कर्मों का जीव से आबद्ध होना
कर्मों के जीव की ओर अन्तर्वाह का अवरुद्ध होना
जीव से आबद्ध कर्मों का नष्ट होना
Q.87
बौद्ध दर्शन के चार आर्य सत्यों में सम्मिलित नहीं है
सर्वं दुःख ।
दुःख अकारण है ।
दुःख निरोध सम्भव है ।
दुःख निरोध का मार्ग है ।
Q.88
गान्धी द्वारा रचित ‘हिन्द स्वराज’ है
उनकी आत्मकथा
समाचार-पत्रों में लिखे गए लेखों का संकलन
उनके सामाजिक-राजनीतिक विचारों की प्रस्तुति
1947 तक के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का ब्यौरा
Q.89
गान्धी का विश्वास था
किसी भी प्रकार के साधनों से साध्य की प्राप्ति में
साध्य और साधनों की पवित्रता में
अहिंसा में जब तक कि दमनकर्ता हिंसा का प्रयोग न करें
अधिकतम व्यक्तियों के अधिकतम सुख में
Q.90
सुकरात के अनुसार
सद्गुण की प्राप्ति असंभव है ।
सद्गुण जन्म से ही माता-पिता से उत्तराधिकार रूप में प्राप्त होता है ।
सद्गुण सापेक्षिक और परिवर्तनीय होता है ।
ज्ञान सद्गुण है ।
Q.91
सुकरात के नीतिशास्त्र का उपयुक्ततम लक्षण है
परिणामनिरपेक्ष नीतिशास्त्र
प्रयोजनवादी नीतिशास्त्र
परिणामसापेक्ष नीतिशास्त्र
सद्गुण नीतिशास्त्र
Q.92
देकार्त के अनुसार, ‘अन्तर-क्रियावाद’ व्याख्या करता है
ईश्वर और मनुष्य के सम्बन्ध की
ईश्वर और जगत के सम्बन्ध की
पुरुष और स्त्री के सम्बन्ध की
मानस और शरीर के सम्बन्ध की
Q.93
स्वार्थमूलक सुखवाद के अनुसार
कर्तव्य के लिए कर्तव्य ही नैतिकता है।
सुख ही नैतिकता का मानदण्ड है।
अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख ही नैतिक सिद्धान्त है।
केवल शुभ संकल्प ही निरपेक्ष रूप से शुभ है।
Q.94
काण्ट के अनुसार नैतिक नियम है
संवेग और भावना आधारित
संदर्भ और स्थान के अनुकूल परिवर्तनीय
एक निरपेक्ष आदेश
उच्चतर साध्यों हेतु साधन
Q.95
काण्ट बल नहीं देता है
कर्तव्य पर
नैतिक नियम पर
कर्ता की स्वतंत्रता पर
कर्मों के परिणाम पर
Q.96
दण्ड का वह सिद्धान्त जिसके अनुसार अपराधी को दण्ड उसके स्वयं के भले के लिए दिया जाता है
दण्ड का प्रतिशोधात्मक सिद्धान्त
दण्ड का निवारक सिद्धान्त
दण्ड का सुधारात्मक सिद्धान्त
दण्ड का निरोधक सिद्धान्त
Q.97
सामाजिक विज्ञान के संप्रत्यय के संदर्भ में निम्न में से कौन सा गुण सम्मिलित नहीं किया गया है?
मानवीय सम्बन्धों के साथ व्यवहार करना
समकालीन समाज का अध्ययन
समाज की भविष्य की समस्याओं का अध्ययन
जीने की कला से व्यवहार करना
Q.98
ब्लूम के शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण के अनुसार संज्ञानात्मक पक्ष की श्रेणियों का पदानुक्रम है-
अवबोध - ज्ञान - अनुप्रयोग - संश्लेषण - विश्लेषण - मूल्यांकन
अवबोध - अनुप्रयोग - ज्ञान - संश्लेषण - विश्लेषण - मूल्यांकन
ज्ञान - अवबोध - अनुप्रयोग - संश्लेषण - विश्लेषण - मूल्यांकन
ज्ञान - अवबोध -अनुप्रयोग - विश्लेषण - संश्लेषण - मूल्यांकन
Q.99
नागरिक-शास्त्र इतिहास के साथ निम्नलिखित में से किस प्रकार
के सह-सम्बन्ध दर्शाता है?
लम्बवत् (शीर्षात्मक) सह-संबंध
अनुप्रस्थीय सह-संबंध
शून्य सह-संबंध
सह-लम्बवत् सह-संबंध
Q.100
अन्य विद्यालयी विषयों के साथ सामाजिक विज्ञान के सहसम्बन्ध का लाभ है :
(A) विभिन्न विषयों में समन्वय स्थापित करता है ।
(B) छात्रों में विषय के प्रति रुचि विकसित करता है ।
(C) पाठ्यचर्या के भार को बढ़ाना ।
(D) छात्रों में सामाजिक गुणों का विकास करता है ।
सही उत्तर का चयन नीचे दिये गये कूट से कीजिये :
कूट :
(A) तथा (C) सही हैं ।
(B), (C) तथा (D) सही हैं ।
(A), (B) तथा (C) सही हैं ।
(A), (B) तथा (D) सही हैं ।