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राजस्थान भूगोल

मृदा

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 Jr. Instructor Ele. Mec. 23 Dec. 2019, कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिकल)-23.12.2019

ऊसर मृदा किसे कहते हैं -

ऊसर ⁠‌​​‌‌‌‌‌​⁠मृदा मुख्य रूप से खारी एवं लवणीय मृदा को कहा जाता है। यह मृदा कृषि के दृष्टिकोण से अनुपजाऊ होती है। शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में अत्यधिक सिंचाई के कारण इस मिट्टी का निर्माण होता है, जहाँ मिट्टी की सतह पर सफेद परत जम जाती है। लवणीय मिट्टी में सोडियम क्लोराइड (NaCl) की मात्रा अधिक होती है।…

Q.2 Veterinary Officer 2 Aug., 2020

डीडवाना, पंचपदरा, सांभर झीलों में मृदा पायी जाती है-

राजस्थान ⁠‌‌​‌‌‌​​‌‌​‌⁠की खारे पानी की झीलों जैसे डीडवाना, पचपदरा, और सांभर के आसपास सोलनचाॅक (Solonchak) मृदा पाई जाती है। इस मृदा को लवणीय मिट्टी के रूप में जाना जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में रेह, कल्लड़, या ऊसर भी कहा जाता है।…

Q.3 खाद्य सुरक्षा अधिकारी, परीक्षा-2019

कृषि विभाग, राजस्थान के मृदा वर्गीकरण के अनुसार ‘रेवरिना’ मृदा पायी जाती है-

कृषि ⁠‌‌​‌‌‌​​‌‌‌​⁠विभाग, राजस्थान के मृदा वर्गीकरण के अनुसार ‘रेवरिना’ (Reverina) मृदा मुख्य रूप से श्रीगंगानगर जिले में पाई जाती है। यह मिट्टी राज्य के उत्तरी सिंचित मैदानी भाग की एक विशिष्ट पहचान है। श्रीगंगानगर में रेवरिना मृदा के अतिरिक्त साईरोजेक्स मृदा भी पाई जाती है।…

Q.4 हथकरघा निरीक्षक (उद्योग विभाग) परीक्षा-22.12.2019

राजस्थान में अल्फिसोल्स मृदाएं निम्न में से कहाँ पायी जाती है-

राजस्थान ⁠‌‌​‌‌‌​‌​​​​⁠में अल्फीसोल्स (Alfisols) मृदा मुख्य रूप से राज्य के पूर्वी मैदान में अधिक पाई जाती है। यह उन क्षेत्रों की विशेषता है जहाँ की जलवायु आर्द्र एवं उपार्द्र होती है। इस मृदा का विस्तार प्रमुख रूप से जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, करौली और धौलपुर जैसे जिलों के क्षेत्रों में देखा जाता है।…

Q.5 R.A.S.- 1994,जेल प्रहरी परीक्षा 20-10-2018, Shift -III, R.A.S.- 1994,जेल प्रहरी परीक्षा 20-10-2018, Shift -III, R.A.S.- 1994,जेल प्रहरी परीक्षा 20-10-2018, Shift-III

राजस्थान में भूरी मिट्टी का प्रसार क्षेत्र है-

राजस्थान ⁠‌‌​‌‌‌​‌​‌‌‌⁠में भूरी मिट्टी (Brown Soil) का मुख्य प्रसार क्षेत्र बनास नदी का प्रवाह क्षेत्र (बनास बेसिन) है। बनास के मैदान (जिसमें मेवाड़ मैदान और मालपुरा-करौली मैदान शामिल हैं) में मुख्यतः भूरी मिट्टी पाई जाती है। इसके विस्तार वाले जिलों में टोंक, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, अजमेर और उदयपुर शामिल हैं।…

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Q.6 R.A.S. Pre. 1998,जेल प्रहरी परीक्षा 27-10-2018, Shift -I, R.A.S. Pre. 1998,जेल प्रहरी परीक्षा 27-10-2018, Shift -I

हाड़ौती पठार की मिट्टी किस प्रकार की है -

राजस्थान ⁠‌​‌​​‌​‌‌​‌​​​⁠के हाड़ौती पठार (दक्षिण-पूर्वी राजस्थान) में मुख्य रूप से मध्यम काली मिट्टी पाई जाती है, जिसे वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार वर्टीसॉल (Vertisols) कहा जाता है। इस मिट्टी का निर्माण ज्वालामुखी के बेसाल्ट लावा चट्टानों से हुआ है। हाड़ौती क्षेत्र के प्रमुख जिले कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ इसी मृदा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।…

Q.7 कथन आधारित QUESTION BOOKLET, Common Eligibility Test(Senior Secondary Level) - 2024 - Master Question Paper P12

नीचे दो कथन दिए गए हैं–
कथन-I : काली मिट्टी राजस्थान के कोटा, बूंदी, बाराँ और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
कथन-II : काली मिट्टी में नाइट्रोजन तो पर्याप्त मात्रा में होती है परन्तु कैल्शियम की कमी होती हैं।

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें —

राजस्थान ⁠‌​​​‌‌​​‌​​‌​​‌‌​⁠के दक्षिण-पूर्वी भाग जिसे हाड़ौती क्षेत्र कहा जाता है, में मुख्य रूप से काली मिट्टी (वर्टीसॉल) पाई जाती है। इस भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत कोटा, बूंदी, बाराँ और झालावाड़ जिले आते हैं, जहाँ इस मिट्टी का निर्माण बेसाल्ट लावा चट्टानों से हुआ है।…

Q.8 कथन आधारित Stenographer-15.10.2024

निम्न कथनों में उपयुक्त कथन है-

कथन (1) - जलोढ़ (एलुवियल) मृदा राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिले जैसे हनुमानगढ़, अलवर, धौलपुर और दौसा में पायी जाती है।
कथन (2) - इस मृदा में पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन होता है परन्तु चूने (लाइम), फॉस्फोरस और आयरन (लौह) की कमी होती है।

जलोढ़ ⁠‌​​‌‌​‌‌‌​‌​​‌​​‌‌⁠मृदा (Alluvial Soil) राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी भागों में पाई जाने वाली मृदा है। यह मृदा मुख्य रूप से राज्य के हनुमानगढ़, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा और टोंक जिलों में विस्तृत है। इस मृदा का निर्माण नदियों द्वारा जमा किए गए अवसादों से होता है, जिस कारण इसे ‘दोमट’ या ‘कछारी’ मिट्टी भी कहा जाता है।…

Q.9 सुमेलित करें Pashu Parichar (Sift-I) -02.12.2024

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए –

सूची-I (मृदा के प्रकार) सूची-II (सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषताएं)
a. लाल पीली मृदा i. रेतीली दोमट संरचना होती है।
b. मरूस्थली मृदा ii. लौह अंश की मौजूदगी
c. काली मृदा iii. जल धारण एवं शोषण क्षमता कम पायी जाती है।
d. जलोढ मृदा iv. चीका प्रधान मृदा

नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनिए –

भारत ⁠‌​​​‌‌​​‌​​‌​‌​​​⁠में मृदाओं का वर्गीकरण उनके गुणों के आधार पर किया जाता है। लाल-पीली मृदा की एक प्रमुख विशेषता इसमें लौह अंश की मौजूदगी (जैसे आयरन ऑक्साइड) है, जिसके कारण इसका रंग विशिष्ट होता है। मरूस्थली मृदा मुख्य रूप से राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है।…

Q.10 अभिकथन-कारण Patwar-24.12.2015

अभिकथन (A) : राजस्थान में पाई जाने वाली सीरोजम मिट्टी की उर्वरा शक्ति अपेक्षाकृत कम होती है।
कारण (R) : सीरोजम मिट्टी में नाइट्रोजन तथा कार्बनिक पदार्थों की कमी होती है।

राजस्थान ⁠‌​​‌‌​‌‌‌​‌​​​‌‌​​⁠में सीरोजम मिट्टी का विस्तार मुख्य रूप से पाली, नागौर, जालौर, जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों में पाया जाता है। इस मिट्टी को भूरी-रेतीली मिट्टी के रूप में भी जाना जाता है। अभिकथन (A) सही है क्योंकि सीरोजम मिट्टी की उर्वरा शक्ति अपेक्षाकृत कम होती है।…

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