Q.61
प्रत्यायोजन में अधीनस्थों को निम्नलिखित में से कौन सा सौंपा जाता है ?
- (A)
प्राधिकार एवं कर्त्तव्य
- (B)
कर्त्तव्य एवं उत्तरदायित्व
- (C)
कर्त्तव्य, प्राधिकार एवं उत्तरदायित्व
- (D)
उत्तरदायित्व एवं प्राधिकार
150 सवाल · पेज 4/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.61
प्रत्यायोजन में अधीनस्थों को निम्नलिखित में से कौन सा सौंपा जाता है ?
प्राधिकार एवं कर्त्तव्य
कर्त्तव्य एवं उत्तरदायित्व
कर्त्तव्य, प्राधिकार एवं उत्तरदायित्व
उत्तरदायित्व एवं प्राधिकार
Q.62
निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ?
वैज्ञानिक प्रबंध - टेलर
नौकरशाही सिद्धान्त - मैक्स वेबर
द मैनेजिरियल ग्रिड - साइमन
आवश्यकताओं का पदसोपान - मैस्लो
Q.63
अभिप्रेरणा का द्वि-घटक सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया है ?
हर्जबर्ग
मैस्लो
मैकग्रेगर
फिडलर
Q.64
लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक 2011 के अनुसार लोकपाल कार्यालय में 1 अध्यक्ष तथा अधिकतम सदस्यों की संख्या हो सकती है?
10 सदस्य
9 सदस्य
8 सदस्य
7 सदस्य
Q.65
सामान्य लोक सेवाओं के विषय में निम्न कथनों पर विचार कीजिए :
(i) वे अधिकांश सर्वोच्च प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हैं ।
(ii) वे कुछ संगठनों के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं ।
(iii) वे मंत्रियों को परामर्श देते हैं ।
(iv) वे कुछ सार्वजनिक उद्यमों के मुखिया के रूप में कार्य करते हैं ।
नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन करें :
(i), (ii), (iii) और (iv)
(i), (ii) और (iii)
(i) और (iii)
केवल (i)
Q.66
वेद यह प्रस्तावित करते हैं कि यह सारा ब्रह्माण्ड एक व्यवस्थित इकाई है जो एक सर्वव्यापी नियम के अन्तर्गत है । इस नियम का नाम है :
गुरुत्वाकर्षण का नियम
भाग्य का नियम
ऋत का नियम
क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम
Q.67
निम्न उपनिषद् में हम नचिकेता और यम के मध्य एक ज्ञानपूर्ण संवाद पाते हैं । इस प्रसिद्ध उपनिषद् का नाम है :
बृहदारण्यक उपनिषद्
ऐतरेय उपनिषद्
माण्डूक्य उपनिषद्
कठोपनिषद्
Q.68
सुख में गुणात्मक भेद को कौन अस्वीकार करता है ?
मिल
बेन्थम
सुकरात
प्लेटो
Q.69
‘कर्त्तव्य के लिए कर्त्तव्य’ नैतिक सिद्धान्त सम्बन्धित है
नैतिक सुखवाद से
उपयोगितावाद से
परिणाम निरपेक्षतावाद से
मनोवैज्ञानिक सुखवाद से
Q.70
अरस्तू का विश्वास था कि :
सद्गुण जन्मजात है ।
सद्गुण को अभ्यास द्वारा प्राप्त किया जा सकता है ।
सद्गुण ईश्वर प्रदत्त है ।
सद्गुण समाज के द्वारा प्रदान किये जाते हैं ।
Q.71
‘धर्म’ पुरुषार्थ अन्य तीन की तुलना में प्रथम है । इसे प्राथमिक स्थान देना यह संकेत करता है कि :
अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ निम्न हैं ।
ये तीनों धर्म से सम्बन्धित और संदर्भित होकर पुरुषार्थ बनते हैं ।
पुरुषार्थ एक दूसरे से सम्बन्धित नहीं हैं ।
मोक्ष पुरुषार्थ अन्य तीनों को स्वयं में समाहित कर लेता है ।
Q.72
यदि आप एक अच्छा कार्य करते हैं किन्तु उस अच्छे (उचित) कार्य को करने के लिये रिश्वत ले लेते हैं तो आप उसके औचित्य को विकृत कर देते हैं । गांधी नीति नियम के अनुसार, यह निम्न में से किसके अन्तर्गत माना जाएगा ?
साधन की अशुचिता
साध्य की अशुचिता
नैतिक कार्य
अस्तेय
Q.73
निरपेक्ष आदेश :
यह सार्वभौमिक है ।
यह सापेक्ष है ।
यह व्यक्तिनिष्ठ है ।
यह तथ्यात्मक है ।
Q.74
आप एक सड़क पर दुर्घटना देखते हैं और जख्मी को तुरन्त अस्पताल पहुँचाते हैं जो आपका चचेरा भाई था । अतः आप समय और धन उसके ठीक होने में लगाते हैं । काण्ट के नीति नियम के अनुसार आपका यह कार्य “नैतिक कार्य” नहीं माना जा सकता क्योंकि :
आपने अपराधी की रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई ।
आप उसे सबसे नजदीक अस्पताल ले गये जबकि आपको उसे ‘सुपर स्पेश्यलिटी’ अस्पताल ले जाना चाहिये था ।
आपने दुर्घटनाग्रस्त के साथ सभी अच्छे कृत्य किये क्योंकि वह आपका चचेरा भाई था ।
आपने जख्मी व्यक्ति के मोबाइल फोन और पर्स की कोई साल-संभाल नहीं की ।
Q.75
प्रारम्भ में अर्जुन कुरुक्षेत्र-युद्ध लड़ने के लिये तैयार नहीं था और वह युद्ध लड़ने के विरुद्ध तर्क दिये जा रहा था । समस्या के प्रति उसके इस दृष्टिकोण को श्रीकृष्ण ने नाम दिया
निष्काम कर्मयोग
कर्म पलायन
भक्ति योग
बुद्धि योग
Q.76
जैन दर्शन में मोक्ष प्राप्त व्यक्ति (जीवन्मुक्त) को कहते हैं
अर्हत्
केवली
स्थितप्रज्ञ
समत्व योगी
Q.77
दण्ड का निवारक सिद्धांत नैतिक दृष्टि से योग्य सिद्धांत नहीं माना गया था क्योंकि :
यह अपराध रोकने के लिये अपराधी को एक साधन मानता है ।
सुधार का अवसर नहीं देता है ।
अपराध की तुलना में दण्ड अधिक देता है ।
अपराध के प्रति भय अधिक उत्पन्न करता है, अपराध की अनुभूति की तुलना में ।
Q.78
अशोक के अभिलेखों की भाषा है?
प्राकृत
प्राकृत व खरोष्ठी
प्राकृत, खरोष्ठी व अरमाईक
प्राकृत, अरमाईक व ग्रीक (यूनानी)
Q.79
थेरीगाथा एक भाग है :
सुत्त पिटक का
विनय पिटक का
अभिधम्म पिटक का
दीघनिकाय का
Q.80
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के किस अधिवेशन में ‘गाँधी-इरविन समझौते’ का अनुमोदन किया था?
लाहौर अधिवेशन
कलकत्ता अधिवेशन
त्रिपुरा अधिवेशन
कराची अधिवेशन