Q.121
ढक रहे थे उसका वपु कांत, बन रहा था वह कोमल वर्म। ‘वपु’ का अर्थ है -
- (A)
देह
- (B)
कान
- (C)
वस्त्र
- (D)
मस्तिष्क
150 सवाल · पेज 7/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.121
ढक रहे थे उसका वपु कांत, बन रहा था वह कोमल वर्म। ‘वपु’ का अर्थ है -
देह
कान
वस्त्र
मस्तिष्क
Q.122
“अभिप्राय यही है कि देवी यशोधरा का आकर्षण यदि राजकुमार सिद्धार्थ को बांधकर अपने पास रख सकता, तो क्या वे आज राजकुमार सिद्धार्थ ही न होते?” लहरों के राजहंस का यह संवाद है -
अलका का सुंदरी के प्रति
सुंदरी का नंद के प्रति
सुंदरी का अलका के प्रति
श्यामांग का श्वेतांग के प्रति
Q.123
हरबर्ट के पंच पदीय पाठ योजना का तार्किक क्रम है -
प्रस्तावना $\rightarrow$ प्रस्तुतीकरण $\rightarrow$ तुलना $\rightarrow$ प्रयोग $\rightarrow$ सामान्यीकरण
प्रस्तुतीकरण $\rightarrow$ प्रस्तावना $\rightarrow$ तुलना $\rightarrow$ सामान्यीकरण $\rightarrow$ प्रयोग
प्रस्तावना $\rightarrow$ प्रस्तुतीकरण $\rightarrow$ सामान्यीकरण $\rightarrow$ तुलना $\rightarrow$ प्रयोग
प्रस्तावना $\rightarrow$ प्रस्तुतीकरण $\rightarrow$ तुलना $\rightarrow$ सामान्यीकरण $\rightarrow$ प्रयोग
Q.124
किस विकल्प में समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थभेद सुमेलित नहीं है?
अलि - अली = सखी - भौंरा
व्रण - वर्ण = घाव - रंग
वस्तु - वास्तु = पदार्थ - भवन
मल - मल्ल = गंदगी - पहलवान
Q.125
‘भक्तमाल’ के रचयिता थे -
कृष्ण पयहारी
रामानन्द
नाभादास
अनंतानंद
Q.126
“सनि-कज्जल चख-झख-लगन उपज्यौ सुदिन सनेहु। क्यों न नृपति है भोगवैं लहि सुदेसु सबु देहु।।” उक्त दोहे के विषय में कौनसा तथ्य गलत है?
नायक का राजा के रूप में चित्रण।
सखी का नायिका प्रति कथन।
श्लेष और रूपक अलंकार का सौंदर्य।
कवि का ज्योतिष ज्ञान।
Q.127
‘नर का बहाया रक्त, हे भगवान! मैंने क्या किया।’ यह उद्गार किसका है?
युधिष्ठिर
दुर्योधन
सत्य
भीष्म पितामह
Q.128
आधुनिक काल को तीन चरणों में विभक्त करके उन्हें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय उत्थान किसने कहा है?
हजारी प्रसाद द्विवेदी
डॉ. विजयेन्द्र स्नातक
डॉ. नगेंद्र
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Q.129
निम्नलिखित में संदेहवाचक वाक्य है -
अध्यापक के साथ संभवतः छात्र भी आएँ।
क्या तुम मेरे साथ चलोगे?
अगर तुमने परिश्रम किया होता तो सफल हो जाते।
संभावना पहली कक्षा में पढ़ती है।
Q.130
किस लोकोक्ति का भावार्थ सही नहीं है?
नेकी कर दरिया में डाल - भला करके भूल जाना चाहिए
होनहार बिरवान के होत चीकने पात - स्वस्थ पौधे के पत्ते चीकने होते हैं
हथेली पर सरसों नहीं उगती - समय आने पर काम होता है, जल्दबाजी से नहीं
न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी - समस्या को जड़ से मिटाना
Q.131
“हमारे विद्यालय में, ऐसे छात्र पाए जाते हैं जो दोषरहित हैं परंतु उन्हें अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए सहायता की आवश्यकता है।” किसने कहा?
ब्लेयर
थॉर्नडाइक
बी.एफ. स्किनर
जॉन डीवी
Q.132
द्विवेदीयुगीन काव्यधारा के विषय में कौनसा कथन सही नहीं है?
इस युग का कवि रूढ़िमुक्त होकर नए युग की संवेदनाओं को ग्रहण करना चाहता था।
इस युग के कुछ कवियों ने ब्रजभाषा में भी काव्य रचना की है।
आचार्य शुक्ल ने इसे ‘नई धारा (द्वितीय उत्थान)’ नाम दिया।
इस युग में प्रबंधात्मक रचनाओं का नितांत अभाव रहा।
Q.133
किस विकल्प में गुणवाचक विशेषण नहीं हैं?
पिछला, वर्तमान, नया
उचित, शांत, सीधा
सब, यथेष्ट, समूचा
काला, बुरा, दुष्ट
Q.134
आचार्य वामन के मतानुसार गुण विषयक कौनसा कथन सही नहीं है?
अर्थ की स्पष्टता प्रसाद गुण है।
गुण काव्य का नित्य तत्त्व है।
ये काव्य के शोभाकारक धर्म हैं।
गुणों की कुल संख्या तीन है।
Q.135
‘पथिक! संदेशो कहियो जाय।’ पद में पथिक शब्द किसके लिए आया है?
अक्रूर के लिए
मथुरा जाने वाले व्यक्ति के लिए
उद्धव के लिए
गोप के लिए
Q.136
अनुभूति प्रधान पाठ किसे कहा जाता है?
सूचना प्रधान पाठों को
कौशल पाठों को
साहित्यिक पाठों को
प्रायोगिक पाठों को
Q.137
रामचरित मानस के बालकाण्ड में वक्ता-श्रोता के रूप में किसका उल्लेख नहीं है?
काकभुशुण्डि - याज्ञवल्क्य
याज्ञवल्क्य - विश्वामित्र
शिव - काकभुशुण्डि
याज्ञवल्क्य - भरद्वाज
Q.138
रीतिकालीन साहित्य के विषय में असत्य कथन है -
मतिराम के काव्य में ऋतुवर्णन सर्वाधिक है।
घनानंद का प्रेम एकांगी है।
भूषण के काव्य में अतिशयोक्ति है।
देव रीतिबद्ध काव्य धारा के कवि हैं।
Q.139
‘दाँतों तले अँगुली दबाना’ मुहावरे का अर्थ है -
दाँतों से अँगुली काटना।
प्रभाव जमाना।
आश्चर्य चकित होना।
दुखी हो जाना।
Q.140
प्रेरणार्थक क्रिया के संबंध में कौनसा गलत कथन है?
अधिकतर धातुओं से दो-दो प्रकार की प्रेरणार्थक क्रियाएँ बनती हैं।
मूल धातु के जिस विकृत रूप से क्रिया के व्यापार में कर्ता पर किसी की प्रेरणा समझी जाती है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।
सभी प्रेरणार्थक क्रियाएँ अकर्मक होती हैं।
मूल धातु के अंत में ‘आ’ जोड़ने से पहली प्रेरणार्थक क्रिया और ‘वा’ जोड़ने से दूसरी प्रेरणार्थक क्रिया बनती है।