Q.141
आगमन प्रणाली का रूप है -
- (A)
पाठ्य-पुस्तक प्रणाली
- (B)
सूत्र प्रणाली
- (C)
प्रयोग प्रणाली
- (D)
समानान्तर प्रणाली
150 सवाल · पेज 8/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.141
आगमन प्रणाली का रूप है -
पाठ्य-पुस्तक प्रणाली
सूत्र प्रणाली
प्रयोग प्रणाली
समानान्तर प्रणाली
Q.142
शब्द और उसमें प्रयुक्त प्रत्यय की दृष्टि से सुसंगत विकल्प है -
दयालु - लु
विदित - इत
भाषण - अन
माननीय - ईय
Q.143
निम्नलिखित में गलत कथन है -
विभाव को रस का कार्य कहा जाता है।
संचारी भाव स्थायी भावों के उपकारक होते हैं और उन्हें रस दशा तक पहुँचाते हैं।
अनुभाव द्वारा रसास्वादन की सूचना प्राप्त होती है।
संचारी भाव रस की सिद्धि तक स्थिर नहीं रहते, अपितु उत्पन्न और विलीन होते रहते हैं।
Q.144
रचनाकारों और रचनाओं को सुमेलित कीजिए -
| रचनाकार | रचनाएं |
|---|---|
| (अ) अशोक वाजपेयी | (i) रात अब भी मौजूद है |
| (ब) लीलाधर जगूड़ी | (ii) पहाड़ पर लालटेन |
| (स) मंगलेश डबराल | (iii) सुरत निरत |
| (द) ऋतुराज | (iv) समय के पास समय है |
विकल्प -
(अ)-ii, (ब)-i, (स)-iv, (द)-iii
(अ)-ii, (ब)-iv, (स)-iii, (द)-i
(अ)-iv, (ब)-i, (स)-ii, (द)-iii
(अ)-iv, (ब)-ii, (स)-i, (द)-iii
Q.145
रंगमंच प्रणाली का दूसरा रूप है -
कक्षाभिनय प्रणाली
व्याख्या प्रणाली
संवाद प्रणाली
संयुक्त प्रणाली
Q.146
निम्नलिखित पात्रों को रचनाओं से सुमेलित कीजिए -
| पात्र | रचना |
|---|---|
| (क) लहनासिंह | (i) पूस की रात |
| (ख) दीवान | (ii) उसने कहा था |
| (ग) फगना | (iii) उजाले के मुसाहिब |
| (घ) हल्कू | (iv) पटाक्षेप नहीं होगा |
सही विकल्प है -
(क)-i, (ख)-iv, (ग)-iii, (घ)-ii
(क)-ii, (ख)-iii, (ग)-iv, (घ)-i
(क)-ii, (ख)-iii, (ग)-i, (घ)-iv
(क)-ii, (ख)-iv, (ग)-iii, (घ)-i
Q.147
‘चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता’, लोकोक्ति का भावार्थ है -
मूर्ख व्यक्ति बहुत समझाने पर भी नहीं समझता।
बातें करने वाले लोग काम नहीं करते।
समझदार व्यक्ति पर बुरी संगति का असर नहीं होता।
निर्लज्ज व्यक्ति पर किसी बात का असर नहीं होता।
Q.148
निम्नलिखित रचनाओं और रचनाकारों का सही युग्म नहीं है -
परमाल रासो - जगनिक
बीसल देव रासो - नरपति नाल्ह
खुमाण रासो - जयदेव
हम्मीर रासो - शाङ्गधर (शार्ङ्गधर)
Q.149
एक बालक जिसकी शिक्षा लब्धि 85 से कम है, उसके सीखने संबंधी कठिनाइयों का ज्ञान प्राप्त करने की क्रिया को क्या कहा जाता है?
निदानात्मक शिक्षण
उपचारात्मक शिक्षण
निदानात्मक व उपचारात्मक शिक्षण
सम्प्राप्ति शिक्षण
Q.150
फगना आदि को लच्छीराम का प्रधान बनना क्यों गवारा नहीं था?
लच्छीराम स्वयं प्रधान नहीं बनना चाहता था।
वह अपनी जाति वालों से मन ही मन विद्वेष रखता था।
उन्हें आशंका थी कि वह रामसिंह के हाथ की कठपुतली बन जाएगा।
वह अनपढ़ और बहुत भोला था।