Q.61
लक्षणा शब्द शक्ति के संबंध में असंगत कथन है -
- (A)
मुख्यार्थ में बाधा
- (B)
मुख्यार्थ और लक्ष्यार्थ का संबंध
- (C)
साक्षात् संकेतित अर्थ का प्रधानता पूर्वक उपयोग
- (D)
अन्यार्थ का गृहीत होना
150 सवाल · पेज 4/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.61
लक्षणा शब्द शक्ति के संबंध में असंगत कथन है -
मुख्यार्थ में बाधा
मुख्यार्थ और लक्ष्यार्थ का संबंध
साक्षात् संकेतित अर्थ का प्रधानता पूर्वक उपयोग
अन्यार्थ का गृहीत होना
Q.62
रौद्र रस का स्थायी भाव है -
रति
उत्साह
क्रोध
जुगुप्सा
Q.63
कौनसे मनोवैज्ञानिक के महत्त्वपूर्ण योगदानों पर शिक्षा मनोविज्ञान का इतिहास आरम्भ होता है ?
जोहान हर्बर्ट
सर फ्रांसिस गाल्टन
जी. स्टेनले हॉल
फ्रोबेल
Q.64
‘सुबरन को ढूँढत फिरै कवि, कामी अरु चोर।’
उक्त पंक्ति में अलंकार है -
रूपक
यमक
श्लेष
उपमा
Q.65
निम्नलिखित में से कौनसी रचना जायसी की नहीं है?
पद्मावत
चित्रावली
अखरावट
आखिरी कलाम
Q.66
निम्नलिखित में से सर्वांग निरूपक कवि हैं -
भूषण
देव
बिहारी
घनानंद
Q.67
“हिंदुआन-छिट्टि उत्तम सुदेस। तहँ उदित दुग्ग दिल्ली सुदेस” प्रस्तुत पंक्ति का संबंध किस रासो ग्रंथ से है?
बीसलदेव रासो
हम्मीर रासो
खुम्माण रासो
पृथ्वीराज रासो
Q.68
प्रोषित-पतिकाएँ हों, जितनी भी सखि, उन्हें निमंत्रण दे आ।
साकेत के नवम सर्ग की इन पंक्तियों के संदर्भ में कौनसा कथन संगत है?
उर्मिला अपना अकेलापन दूर करना चाहती है।
राजमहल के वैभव से प्रोषित-पतिकाओं को परिचित कराना चाहती है।
दुखिया जन ही उर्मिला को सुख दे सकते हैं।
उर्मिला समाजसेवा के यज्ञ में प्रोषित-पतिकाओं को सम्मिलित करना चाहती है।
Q.69
हिन्दी साहित्य के प्रारंभिक काल का आरम्भ 993 ई. से मानने वाले विद्वान हैं -
रामकुमार वर्मा
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
मिश्र बन्धु
राहुल सांकृत्यायन
Q.70
“कबीर ने जिस प्रकार निराकार ईश्वर के लिए भारतीय वेदान्त का पल्ला पकड़ा, उसी प्रकार निराकार ईश्वर की भक्ति के लिए सूफियों का प्रेमतत्व लिया और अपना ‘निर्गुण पंथ’ बड़ी धूमधाम से निकाला।” यह कथन किस विद्वान का है?
रामचन्द्र शुक्ल
रामकुमार वर्मा
रामचन्द्र वर्मा
हजारी प्रसाद द्विवेदी
Q.71
‘सतगुर मिल्या त का भया, जे मनि पाड़ी भोल। पासि बिनंठा कपड़ा, क्या करै बिचारी चोल।।’ इस साखी में प्रयुक्त ‘भोल’ और ‘चोल’ शब्दों के क्रमशः निकटतम अर्थ हैं -
गलती - चोला
भूल - मजीठ रंग
भोलापन - चौकस
भलाई - चावल
Q.72
निम्नलिखित में से कौनसी निर्मितवादी अधिगम प्रदान करने वाली कक्षा कक्ष के अध्यापक की उपयुक्त भूमिका नहीं है?
अध्यापक सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करता है।
अध्यापक सहयोगी के रूप में भूमिका निभाता है।
अध्यापक अपनी तरफ से सूचनाएँ देने का कार्य करता है, विद्यार्थी मात्र सुनने का कार्य करते हैं।
विद्यार्थियों के पास पहले से जो ज्ञान है, उसको अध्यापक समझने का प्रयास करता है, तद्नुसार गतिविधि हेतु प्रयास करता है।
Q.73
काव्य-लक्षण के संबंध में सुमेलन नहीं है -
* रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यं - पंडित राज जगन्नाथ
* वाक्यं रसात्मकं काव्यं - पं. विश्वनाथ
* तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलङ्कृती - मम्मट
* रीतिरात्मा काव्यस्य - रुद्रट
रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यं - पंडित राज जगन्नाथ
वाक्यं रसात्मकं काव्यं - पं. विश्वनाथ
तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलङ्कृती - मम्मट
रीतिरात्मा काव्यस्य - रुद्रट
Q.74
‘कहानी का वह संक्षिप्त रूप जिसमें प्रारम्भ से अन्त तक कहानी की सभी घटनाओं और पात्रों का उल्लेख किया गया हो’, को कहते हैं -
संवाद
कथानक
उद्देश्य
पात्र
Q.75
निम्नलिखित उदाहरणों में अभिधा शब्द शक्ति वाला विकल्प है -
प्रेमियों का प्रेम गीतातीत है, हार भी जिसमें परस्पर जीत है।
लहरें व्योम चूमतीं उठती चपलाएँ असंख्य नचतीं।
चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही हैं जल थल में।
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।
Q.76
‘हे, शरण दायिनी देवि! तू करती सबका त्राण है। तू मातृभूमि सन्तान हम, तू जननी तू प्राण है।।’ उक्त काव्य पंक्तियाँ किस छन्द में निबद्ध हैं?
दोहा
उल्लाला
गीतिका
हरिगीतिका
Q.77
मीराबाई की रचना नहीं है -
राग गोविन्द
श्याम सगाई
गीत-गोविन्द की टीका
नरसीजी रो मायरो
Q.78
रिपोर्ताज के विषय में असंगत कथन है -
रिपोर्ताज में बाह्य स्वरूप की अभिव्यक्ति कम और आंतरिक स्वरूप की अधिक होती है।
रिपोर्ताज का स्वरूप कलात्मक होता है।
रिपोर्ताज में मुख्यतः घटना होती है।
रिपोर्ताज लेखक का उद्देश्य वस्तुगत तथ्यों को प्रभावपूर्ण तरीके से अभिव्यक्त करना होता है।
Q.79
“एक बालक परीक्षा में फेल हो जाता है, तो वह बहाना गढ़ता है, कि प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर का था।” बालक द्वारा प्रकट की गई समायोजन की यह रक्षा युक्ति किस श्रेणी में आती है?
प्रक्षेपण
तादात्मीकरण
औचित्य स्थापना
अन्तःक्षेपण
Q.80
“’छायावाद’ नाम चल पड़ने का परिणाम यह हुआ कि बहुत से कवि रहस्यात्मकता, अभिव्यंजना के लाक्षणिक वैचित्र्य, वस्तुविन्यास की विश्रृंखलता, चित्रमयी भाषा और मधुमयी कल्पना को ही साध्य मानकर चले।” यह कथन किसका है?
मुकुटधर पाण्डेय
नन्द दुलारे वाजपेयी
रामचंद्र शुक्ल
नगेन्द्र