Q.41
‘जिसका हृदय उतना मलिन जितना कि शीर्ष बलक्ष है।’ बलक्ष से आशय है -
- (A)
बलशाली
- (B)
वैभवशाली
- (C)
वलयाकार
- (D)
चमकीला
150 सवाल · पेज 3/8
इस पेपर का Syllabus:Syllabus (हिंदी)
Q.41
‘जिसका हृदय उतना मलिन जितना कि शीर्ष बलक्ष है।’ बलक्ष से आशय है -
बलशाली
वैभवशाली
वलयाकार
चमकीला
Q.42
‘लहरों के राजहंस’ नाटक का पात्र निम्नलिखित में से कौन नहीं है?
नीहारिका
मैत्रेयी
शशांक
नन्द
Q.43
सोरठा छंद है -
वर्णिक अर्द्ध सम छंद
मात्रिक अर्द्धसम छंद
वर्णिक सम छंद
मात्रिक विषम छंद
Q.44
भूषण द्वारा रचित ‘शिवराज भूषण’ काव्य का मुख्य विषय है -
छत्रसाल की वीरता
प्रकृति चित्रण
राष्ट्रीय भावना
अलंकार
Q.45
‘गज-गैंडा धीर न धरै, वज्र पड़ै वघ-वाव’, ‘वीर सतसई’ पद में वघ-वाव शब्द का अर्थ है -
वज्र जैसा शस्त्र
शत्रु पर प्रहार
सिंह की गंध
वन की वायु
Q.46
‘तुम धन्य हो! तुम्हें धिक्कार है!!’ ‘लोभ और प्रीति’ निबंध में उक्त उद्गार का लक्ष्य है?
आलसी
प्रेमी
लोभी
योगी
Q.47
निम्नलिखित रचनाकारों को उनकी रचनाओं के नाम से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प का चयन कीजिए -
| रचनाकार | रचनाएं |
|---|---|
| (क) रघुवीर सहाय | (i) नाटक जारी है |
| (ख) धूमिल | (ii) गर्म हवाएं |
| (ग) लीलाधर जगूड़ी | (iii) संसद से सड़क तक |
| (घ) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना | (iv) कुछ पते कुछ चिट्ठियां |
सही विकल्प है -
(क)-iii, (ख)-i, (ग)-ii, (घ)-iv
(क)-iv, (ख)-iii, (ग)-i, (घ)-ii
(क)-iv, (ख)-ii, (ग)-i, (घ)-iii
(क)-ii, (ख)-i, (ग)-iii, (घ)-iv
Q.48
निम्नलिखित में से असंगत कथन कौनसा है?
जहाँ अपने से छोटों के प्रति शुभकामनाएँ और सद्भावनाएं प्रकट की जाएँ, वहां विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग होता है।
महत्वपूर्ण कथन, कहावत, संधि आदि को उद्धृत करने में दुहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग होता है।
जहाँ स्थिति निश्चित न हो, वहाँ प्रश्नवाचक चिह्न का प्रयोग होता है।
जहाँ कोई विशेष शब्द, पद, वाक्य-खंड इत्यादि उद्धृत किए जाएँ वहाँ दुहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग होता है।
Q.49
मौखिक अभिव्यक्ति के मूल्यांकन हेतु कौनसी गतिविधि उपयुक्त नहीं है?
लेखन कार्य
वाद-विवाद
परिचर्चा
उत्सवों के अवसर पर भाषण
Q.50
निम्नलिखित में से कौनसा कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल के विचारों के विपरीत है?
आलम रीतिबद्ध रचनाएँ भी करते थे।
‘लोगन कवित्त कीबो खेल करि जानो है।’ कहकर ठाकुर कवियों को चेतावनी दे रहे हैं कि कवि कर्म कठिन काम है।
‘विरह वारीश’ और ‘इश्कनामा’ बोधा की रचनाएँ हैं।
घनानंद की अधिकांश कविता भक्ति भाव की कोटि में नहीं आएगी, श्रृंगार की ही कही जाएगी।
Q.51
विभावना अलंकार होता है -
कारण के होने पर भी कार्य न हो।
कारण के साथ कार्य हो जाए।
जब कारण कहीं और कार्य कहीं और हो।
कारण के बिना कार्य हो जाए।
Q.52
“भगत देखि राजी हुय्याँ, जगत देख्याँ रूँयाँ। असुवाँ जल सींच प्रेम बेल बूँयाँ।” उक्त पद्यांश से संबंधित पद के अनुसार मीराँ के रुदन के पीछे कौनसा कारण नहीं है?
आश्रयहीनता
बंधु-बांधवों का विरोध
परिवार वालों के अत्याचार
संसार की दुर्दशा
Q.53
कौनसा विकल्प सुमेलित नहीं है?
कवित्त- प्रत्येक चरण में 32 वर्ण
हरिगीतिका- प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ
द्रुतविलंबित- वर्णिक समवृत्त छंद
चौपाई- मात्रिक सम छंद
Q.54
किसी शिक्षक के कक्षा में अध्यापनार्थ प्रवेश के बाद का पाठ कहलाता है -
पाठ प्रस्तुति पूर्वभाग
पाठ प्रस्तुतिकरण भाग
संकलन भाग
पाठ संयोजन भाग
Q.55
‘वज्र सा कुछ टूटकर स्मृति से गिरा, दब गये कौन्तेय दुसह भार से।’ कुरुक्षेत्र के अनुसार वज्र सा गिरने पर स्मृति हो आई -
अभिमन्यु के अन्यायपूर्ण वध की
युधिष्ठिर की द्यूत क्रीड़ा की
आकाशीय बिजली गिरने की
शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह की
Q.56
निर्देश : प्र.सं. 46 - 48 के उत्तर अपठित गद्यांश के आधार पर दीजिए -
भूमि, जन और जन की संस्कृति को राष्ट्र कहते हैं। प्रत्येक नागरिक पर राष्ट्र के प्रति तीन प्रकार के ऋण हैं - देव ऋण, पितृ ऋण तथा ऋषि ऋण। प्रत्येक नागरिक को अपने-अपने ऋणों को चुकाकर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना चाहिए। राष्ट्र हमारा पालन-पोषण एवं संवर्द्धन करता है, अतः उसे माता के समान माना गया है। हमें राष्ट्र को माँ के समान सम्मान देना चाहिए। राष्ट्र की प्रगति और सुख-समृद्धि में प्रत्येक नागरिक की साझेदारी हो, ऐसा प्रयास करना ही राष्ट्र वंदना है, राष्ट्र पूजा है। यही उसके राष्ट्र प्रेम, देश भक्ति तथा मातृभूमि के प्रति सर्वस्व समर्पण की भावना को प्रकट करता है। राष्ट्र को स्वावलंबी बनाने में हमारी भूमिका निर्णायक सिद्ध होगी। हमें करों का भुगतान पूरी ईमानदारी के साथ करना चाहिए। कर वंचक राष्ट्र की आर्थिक दशा को खोखला करते हैं।
तीनों ऋण चुकाने के उपरांत के लिए क्या अपेक्षित है?
लोकोपयोगी परंपराओं के प्रसार का दायित्व।
दुष्प्रवृत्तियों को दूर करते हुए सत्प्रवृत्तियों को बलिष्ठ बनाने का दायित्व।
जीवन के चतुर्थ काल में मायामोह त्यागकर संन्यास ग्रहण करना।
राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन।
Q.57
“गुरु प्रसाद सूई के नाकै, हस्ती आवै जाँही।” इस पंक्ति में कबीर का अभिप्राय है -
गुरु कृपा से असंभव कार्य भी सहज संभव हो जाते हैं।
गुरु कृपा से हाथी प्राप्त हो जाता है।
गुरु कृपा से सुई भी हाथी के समान महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
गुरु कृपा से सुई से हाथी वश में आ जाता है।
Q.58
निम्नलिखित वाक्यों में से कर्मवाच्य का उदाहरण कौनसा है?
राम आम खाएगा।
आम खाया जाता है।
राम से आम खाया नहीं जाता।
मैंने पुस्तक पढ़ी।
Q.59
राजा मालदेव ने राणा हम्मीर के पास अपनी पुत्री का विवाह प्रस्ताव क्यों भेजा?
पुत्री की इच्छा के वशीभूत होकर
भविष्य के मधुर संबंधों के लिए
छल-कपट की योजनानुसार
रानी के हठ के कारण
Q.60
“मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
करुना निधान सुजान सील सनेहु जानत रावरो।।”
उक्त पद्यांश के अनुसार सीता जी को किसने आशीर्वाद दिया?
पार्वती जी ने
मुनि विश्वामित्र ने
राजा जनक ने
राजा जनक के पुरोहित ने