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RPSC वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) पेपर II हिंदी 2024

150 सवाल · पेज 3/8

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Q.41

चित्रात्मकता, नाद तथा भाव का आनन्द किसके रूप हैं ?

Q.42

‘एक धावा हो जाए तो गर्मी आ जाए’, ‘उसने कहा था’ कहानी में यह कथन किसका है ?

Q.43

निम्नलिखित में से कौन सा हिन्दी शिक्षण में चित्रों का उपयोग नहीं है ?

Q.44

य् वर्ण के सम्बन्ध में असंगत है

Q.45

निम्न में से शुद्ध शब्द है :

Q.46

किस वाक्य में विराम चिह्नों का सही प्रयोग हुआ है ?

Q.47

निम्नलिखित अनुच्छेद के आधार पर उत्तर दीजिए :

जिन कर्मों में किसी प्रकार का कष्ट या हानि सहने का साहस अपेक्षित होता है उन सब के प्रति उत्कण्ठापूर्ण आनन्द उत्साह के अन्तर्गत लिया जाता है । कष्ट या हानि के भेद के अनुसार उत्साह के भी भेद हो जाते हैं । साहित्य-मीमांसकों ने इसी दृष्टि से युद्ध-वीर, दान-वीर, दया-वीर इत्यादि भेद किये हैं । इनमें सबसे प्राचीन और प्रधान युद्ध वीरता है, जिसमें आघात, पीड़ा क्या मृत्यु तक की परवा नहीं रहती । इस प्रकार की वीरता का प्रयोजन अत्यन्त प्राचीन काल से पड़ता चला आ रहा है, जिसमें साहस और प्रयत्न दोनों चरम उत्कर्ष पर पहुँचते हैं । पर केवल कष्ट या पीड़ा सहन करने के साहस में ही उत्साह का स्वरूप स्फुरित नहीं होता । उसके साथ आनन्द-पूर्ण प्रयत्न या उसकी उत्कण्ठा का योग चाहिए । बिना बेहोश हुए भारी फोड़ा चिराने को तैयार होना साहस कहा जायेगा, पर उत्साह नहीं । इसी प्रकार चुपचाप, बिना हाथ-पैर हिलाये, घोर प्रहार सहने के लिए तैयार रहना साहस और कठिन-से-कठिन प्रहार सहकर भी जगह से न हटना धीरता कही जायेगी । ऐसे साहस और धीरता को उत्साह के अन्तर्गत तभी ले सकते हैं जबकि साहसी या धीर उस काम को आनन्द के साथ करता चला जायेगा जिसके कारण उसे इतने प्रहार सहने पड़ते हैं । सारांश यह कि आनन्दपूर्ण प्रयत्न या उसकी उत्कण्ठा में ही उत्साह का दर्शन होता है, केवल कष्ट सहने के निश्चेष्ट साहस में नहीं । धृति और साहस दोनों का उत्साह के बीच संचरण होता है ।

उत्साह का स्वरूप स्फुरित होता है

Q.48

शब्द-शक्तियों के संबंध में कौन सा कथन सुमेलित नहीं है ?

Q.49

“साहित्यिक प्रवृत्तियों और रीति-आदर्शों का साम्य-वैषम्य ही साहित्य के इतिहास के काल-विभाजन का आधार हो सकता है ।” काल-विभाजन के संबंध में यह कथन किसका है ?

Q.50

दोहा-चौपाई में निबद्ध मसनवी शैली में लिखी गई भक्तिकाल की प्रमुख रचना है -

Q.51

“इस द्वितीय उत्थान के आरंभकाल में हम पं. महावीर प्रसाद जी द्विवेदी को पद्यरचना की एक प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में पाते हैं।” उक्त कथन है

Q.52

‘जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।’ बालकाण्ड की इस चौपाई में प्रयुक्त ‘जहाना’ शब्द का अर्थ है

Q.53

हिन्दी भाषा के उद्भव से असंबद्ध अपभ्रंश किस विकल्प में है ?

Q.54

निम्नलिखित में से द्विगु समास का उदाहरण नहीं है :

Q.55

संज्ञा शब्दों के संबंध में असंगत कथन है

Q.56

निम्नलिखित में से किस विकल्प में समश्रुत भिन्नार्थक शब्दों का अर्थ संगत नहीं है ?

Q.57

निम्नलिखित में से छंद विषयक असंगत कथन है :

Q.58

‘लोग हैं लागि कवित्त बनावत मोहिं तौ मेरे कबित्त बनावत ।’
उपर्युक्त पंक्ति किस कवि की है ?

Q.59

‘हाथी हाथळ आहणै,
नाहर जिण-रो नाम ।’

उपर्युक्त पंक्ति में रचनाकार ने किसे सिंह कहा है ?

Q.60

शुक्ल जी के ‘उत्साह’ निबन्ध के अनुसार ‘उत्साह’ में किन दो भावों का योग होता है ?

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