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RPSC वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा) पेपर II हिंदी 2024

150 सवाल · पेज 4/8

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Q.61

“हरि मोरे जीवन प्राण अधार
और आसिरो नाही तुम बिन, तीहूँ लोक मँझार।”
उपर्युक्त पद में मीराँ का अपने आराध्य के प्रति व्यक्त भाव है?

Q.62

वर्तनी की अशुद्धि का व्यावहारिक कारण है

Q.63

व्याकरण शिक्षण हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली वह कौन सी विधि है, जिसमें निम्नलिखित क्रम का अनुसरण किया जाता है ? उदाहरण $\rightarrow$ विश्लेषण $\rightarrow$ सामान्यीकरण $\rightarrow$ परीक्षण

Q.64

‘लहरों के राजहंस’ नाटक का आधार-ग्रंथ है

Q.65

निम्नलिखित में से कौन सा कथन निदानात्मक परीक्षणों के संबंध में सही नहीं है ?

Q.66

‘ढ़’ वर्ण सम्बन्धी सही कथन है

Q.67

निम्नलिखित में से शुद्ध वाक्य नहीं है :

Q.68

‘सिर से पानी गुजरना’ मुहावरे का निकटतम अर्थ है

Q.69

निम्नलिखित अनुच्छेद के आधार पर उत्तर दीजिए :

जिन कर्मों में किसी प्रकार का कष्ट या हानि सहने का साहस अपेक्षित होता है उन सब के प्रति उत्कण्ठापूर्ण आनन्द उत्साह के अन्तर्गत लिया जाता है । कष्ट या हानि के भेद के अनुसार उत्साह के भी भेद हो जाते हैं । साहित्य-मीमांसकों ने इसी दृष्टि से युद्ध-वीर, दान-वीर, दया-वीर इत्यादि भेद किये हैं । इनमें सबसे प्राचीन और प्रधान युद्ध वीरता है, जिसमें आघात, पीड़ा क्या मृत्यु तक की परवा नहीं रहती । इस प्रकार की वीरता का प्रयोजन अत्यन्त प्राचीन काल से पड़ता चला आ रहा है, जिसमें साहस और प्रयत्न दोनों चरम उत्कर्ष पर पहुँचते हैं । पर केवल कष्ट या पीड़ा सहन करने के साहस में ही उत्साह का स्वरूप स्फुरित नहीं होता । उसके साथ आनन्द-पूर्ण प्रयत्न या उसकी उत्कण्ठा का योग चाहिए । बिना बेहोश हुए भारी फोड़ा चिराने को तैयार होना साहस कहा जायेगा, पर उत्साह नहीं । इसी प्रकार चुपचाप, बिना हाथ-पैर हिलाये, घोर प्रहार सहने के लिए तैयार रहना साहस और कठिन-से-कठिन प्रहार सहकर भी जगह से न हटना धीरता कही जायेगी । ऐसे साहस और धीरता को उत्साह के अन्तर्गत तभी ले सकते हैं जबकि साहसी या धीर उस काम को आनन्द के साथ करता चला जायेगा जिसके कारण उसे इतने प्रहार सहने पड़ते हैं । सारांश यह कि आनन्दपूर्ण प्रयत्न या उसकी उत्कण्ठा में ही उत्साह का दर्शन होता है, केवल कष्ट सहने के निश्चेष्ट साहस में नहीं । धृति और साहस दोनों का उत्साह के बीच संचरण होता है ।

अनुच्छेद के आधार पर बताइये कि साहित्य-मीमांसकों ने किसे उत्साह का भेद नहीं माना है ?

Q.70

काव्यांश और उसमें निहित अलंकार का कौन सा जोड़ा असंगत है ?

Q.71

“राजाश्रित कवि…..अपने आश्रयदाता राजाओं के पराक्रमपूर्ण चरितों या गाथाओं का वर्णन करते थे । यही प्रबन्ध-परम्परा ‘रासो’ के नाम से पायी जाती है ।” आदिकाल के सन्दर्भ में यह कथन किस विद्वान का है ?

Q.72

‘आल्हखण्ड’ किस रासो का विकसित रूप माना जाता है ?

Q.73

‘मंटो मेरा दुश्मन’ संस्मरण किस साहित्यकार की रचना है ?

Q.74

‘लेखणि करूँ करंक की, लिखि-लिखि राम पठाउँ।’ कबीर की साखी के इस अंश में प्रयुक्त ‘करंक’ शब्द से क्या अभिप्राय है ?

Q.75

निम्नलिखित में से प्रख्यात ‘ललित निबन्धकार’ नहीं हैं :

Q.76

“वह आए तो मैं जाऊँ ।” वाक्य में प्रयुक्त काल है

Q.77

निम्नलिखित में से किस विकल्प के सभी शब्द स्त्रीलिंग हैं ?

Q.78

निम्न में से संकेतवाचक वाक्य की पहचान कीजिए :

Q.79

“आदिकाल का नाम मैंने ‘वीरगाथा-काल’ रखा है। उक्त काल के भीतर दो प्रकार की रचनाएँ मिलती हैं – अपभ्रंश की और देशभाषा (बोलचाल) की।” उक्त कथन है -

Q.80

पुष्टिमार्गीय भक्ति के संबंध में असंगत कथन है

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