Q.101
‘ससि सो उज्ज्वल तिय वदन, पल्लव सो मृदु पानि ।’
इस पंक्ति में निम्नलिखित में से कौनसा अलंकार है?
- (A)
उत्प्रेक्षा
- (B)
उपमा
- (C)
अपह्नुति
- (D)
रूपक
150 सवाल · पेज 6/8
Q.101
‘ससि सो उज्ज्वल तिय वदन, पल्लव सो मृदु पानि ।’
इस पंक्ति में निम्नलिखित में से कौनसा अलंकार है?
उत्प्रेक्षा
उपमा
अपह्नुति
रूपक
Q.102
‘अधिकार खोकर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है।
न्यायार्थ अपने बन्धु को भी, दण्ड देना धर्म है।’
प्रस्तुत पंक्तियाँ किस छन्द की हैं?
मत्तगयन्द सवैया
चौपाई
हरिगीतिका
द्रुतविलम्बित
Q.103
‘कच समेट कर भुज उलटि, खए सीस पट-टारि।
काकौ मन बाँधै न यह, जूरो बाँधनिहारि।।’
<u>रेखांकित अंश</u> में शब्द-शक्ति है -
अभिधा
लक्षण लक्षणा
उपादान लक्षणा
रूढ़ि लक्षणा
Q.104
किस विकल्प के सभी शब्द तत्सम हैं?
गोंद, दूर्वा, धीरज
निद्रा, पत्र, पत्थर
पाषाण, पर्ण, स्तम्भ
द्राक्षा, थल, नृत्य
Q.105
संविधान के राजभाषा विषयक प्रावधानों की दृष्टि से असंगत विकल्प है -
अनुच्छेद 351 ए तथा बी में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण तथा भाषिक अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए व्यवस्था की गई है।
अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा की प्रसार वृद्धि को निदेशित करता है।
अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।
अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अन्तर्राष्ट्रीय रूप होगा।
Q.106
मंत्री इक बन बसत हमारो ताहि मिले सचु पाइयो।
भ्रमरगीत सार के संदर्भ में मंत्री शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
अक्रूर
राधा
उद्धव
सुदामा
Q.107
निम्नलिखित में एकवचन से बहुवचन का सही विकल्प है -
डिबिया — डिब्बे
गौ — गौएँ
क्यारी — क्यारीं
विद्या — विद्यायें
Q.108
निम्नलिखित में से कौनसा विकल्प शब्द-शक्तियों के संबंध में संगत नहीं है?
मुख्यार्थ को छोड़कर जहाँ पर प्रचलन के कारण अन्य अर्थ ग्रहण किया जाता है, वहाँ रूढ़ि लक्षणा होती है।
जो शब्द शक्ति वक्ता, बोद्धव्य, वाक्य अन्यसन्निधि, वाच्य, प्रकरण, देश, काल, काकु, चेष्टा आदि की विशेषता के कारण व्यंग्यार्थ की प्रतीति कराती है, वह आर्थी व्यंजना कही जाती है।
जहाँ पर मुख्य अर्थ की बाधा होने पर सादृश्य संबंधों के द्वारा उसे ग्रहण किया जाये, वहाँ पर शुद्धा प्रयोजनवती लक्षणा होती है।
जहाँ पर मुख्यार्थ की बाधा होने पर लक्षणा शक्ति से अन्य अर्थ निकलता है, परन्तु उसके बाद भी दूसरा अर्थ प्राप्त होता है, वहाँ पर लक्षणामूला शाब्दी व्यंजना होती है।
Q.109
कविता-संग्रह एवं कवि सुमेलित कीजिए -
| कविता-संग्रह | कवि |
|---|---|
| (i) अपनी केवल धार | (क) बद्रीनारायण |
| (ii) सच सुने कई दिन हुए | (ख) अरुण कमल |
| (iii) दुनिया रोज बनती है | (ग) मदन कश्यप |
| (iv) लेकिन उदास है पृथ्वी | (घ) आलोक धन्वा |
सही विकल्प है -
(i)-(ख), (ii)-(क), (iii)-(घ), (iv)-(ग)
(i)-(क), (ii)-(ख), (iii)-(ग), (iv)-(घ)
(i)-(घ), (ii)-(ग), (iii)-(ख), (iv)-(क)
(i)-(ग), (ii)-(घ), (iii)-(क), (iv)-(ख)
Q.110
साधारणीकरण के संबंध में असंगत कथन है -
अभिनव गुप्त के अनुसार - भाव का साधारणीकरण सामूहिक क्रिया नहीं है, वह कला के क्षेत्र में वैयक्तिक क्रिया है।
डॉ. नगेंद्र के अनुसार - साधारणीकरण कवि की अपनी अनुभूति का होता है।
आचार्य नंददुलारे वाजपेयी के अनुसार - साधारणीकरण रचयिता और उपभोक्ता के बीच भावना का तादात्म्य है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार - साधारणीकरण आलम्बनत्व धर्म का होता है।
Q.111
अर्द्धमागधी अपभ्रंश से विकसित हिंदी बोलियों का समूह है -
बिहारी
राजस्थानी
पश्चिमी हिंदी
पूर्वी हिन्दी
Q.112
इस सवाल में चित्र है — app में देखें
Q.113
आचार्य विश्वनाथ के अनुसार रस के स्वरूप के संबंध में असंगत विकल्प है -
रसानुभव अन्य ज्ञान से रहित होता है।
रस का प्रकाशन आत्मचैतन्य से होता है।
रसानंद ही वास्तविक ब्रह्मानंद है।
रस का उदय वहाँ होता है, जहाँ सतोगुण का उद्रेक होता है।
Q.114
हंस, छोड़ आये कहाँ मुक्ताओं का देश?
यहाँ वन्दिनी के लिए लाये क्या संदेश?
पद में ‘मुक्ताओं का देश’ का व्यंजित अर्थ नहीं है -
साकेत नगरी
मुक्त आत्माओं का देश
मानसरोवर
स्वाधीन जनों का देश
Q.115
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिंदी में रीतिग्रंथों की परंपरा का आरम्भ किस कवि से मानते हैं?
देव
केशवदास
भिखारीदास
चिंतामणि त्रिपाठी
Q.116
बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी न जिवै, जिवै तौ बौरा होइ।।
साखी में ‘भुवंगम’ का अर्थ है -
भवन
वियोगी
भ्रमर
सर्प
Q.117
इन शब्दों को पढ़िए -
(अ) पार्षद
(ब) पारिजात
(स) पार्थक्य
(द) पार्श्वनाथ
शब्दकोश में इन शब्दों का क्रम क्रमशः होगा -
(स), (द), (ब), (अ)
(ब), (द), (अ), (स)
(ब), (स), (द), (अ)
(ब), (अ), (द), (स)
Q.118
किस विकल्प में सभी शब्द यौगिक क्रियाविशेषण हैं?
रात तक, अचानक
दिनभर, दूर
पहले, ठीक
प्रेमपूर्वक, इसलिये
Q.119
“भक्ति के लिये भगवान के साथ वैयक्तिक संबंध आवश्यक है और अवतार उस संबंध के लिए आवश्यक सामग्री प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि मध्ययुग के प्रायः सभी धार्मिक संप्रदायों ने किसी-न-किसी रूप में अवतार की कल्पना अवश्य की है।” मध्यकालीन भक्ति-साहित्य की विवेचना में उक्त कथन किस विद्वान का है?
आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
डॉ. रामकुमार वर्मा
Q.120
शुद्ध शब्द है -
व्यवहारिक
रसिक
विदेशिक
सप्ताहिक