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राजस्थान कला संस्कृति

आभूषण

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 REET Level 2 2022 Shift 3 (Set A)

थमण्यो, आड, ठुस्सी, थेड्यो नामक आभूषण महिलाओं द्वारा कहां धारण किए जाते हैं-

थमण्यो, ⁠‌​‌‌‌‌‌​‌​​​​⁠आड, ठुस्सी और थेड्यो राजस्थान की महिलाओं द्वारा कंठ (गले) में धारण किए जाने वाले पारंपरिक आभूषण हैं। ठुस्सी गले में सटाकर पहना जाने वाला एक आभूषण है, जिसे गलिदटया भी कहा जाता है। आड और थमण्यो (घमण्यो) भी इसी श्रेणी के आभूषण हैं जो राजस्थानी संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।…

Q.2 PTI Exam-2015,JEN Exam-19.05.2022,कनिष्ठ लेखाकार परीक्षा-11.02.2024

कंदोरा आभूषण स्त्रियां शरीर के किस भाग में पहनती है-

कंदोरा ⁠‌​‌‌‌‌‌​‌​‌​​⁠राजस्थान की महिलाओं द्वारा धारण किया जाने वाला कमर का एक अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक आभूषण है। यह मुख्य रूप से भारी चाँदी धातु से निर्मित होता है, जिसका उपयोग सजावट के साथ-साथ परिधान को मजबूती से बाँधने के लिए भी किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे कंदीरा भी कहा जाता है।…

Q.3 1st paper ldc exam 2018, FirstPaper(Master)

जमेला, पीपलपत्रा, अगोट्या, झेला किस अंग के आभूषण है-

जमेला, ⁠‌​‌‌‌‌‌​‌​‌‌​⁠पीपलपत्रा, अगोट्या और झेला राजस्थान की सांस्कृतिक परंपरा में महिलाओं द्वारा कान में धारण किए जाने वाले विशिष्ट आभूषण हैं। पीपलपत्रा (जिसे पीपलपत्र या पीपल पन्ना भी कहा जाता है) कान का एक प्रमुख आभूषण है। अगोट्या और जमेला भी स्थानीय स्तर पर प्रचलित कान के आभूषणों के नाम हैं।…

Q.4 Reet L-2 Exam-23/07/2022, REET-L2, 23 July 2022 Shift-II,JEN Civil Degree (Non TSP) 21 Aug. 2016, REET (Level - II, S-II) -23.07.2022,II Grade (Sans.) -12.2.2023 (S-I), REET Level 2 2022 Shift 2 (Set A)

तुलसी, हालरो, तिमणियाँ तथा पोत नामक आभूषण महिलाओं द्वारा शरीर के कौनसे भाग पर पहने जाते हैं?

तुलसी, ⁠‌‌​‌​​​‌‌‌​​‌‌‌​⁠हालरो, तिमणियाँ और पोत राजस्थान की महिलाओं द्वारा गले (कंठ) में धारण किए जाने वाले पारंपरिक आभूषण हैं। तिमणियाँ विशेष रूप से सोने से निर्मित होता है, जिसकी बनावट चौकोर या अर्द्धचन्द्राकार होती है और इसमें नगीने जड़े रहते हैं। यह विवाहित महिलाओं द्वारा धार्मिक अवसरों और त्यौहारों पर पहना जाता है।…

Q.5 कथन आधारित

राजस्थान में आभूषण निर्माण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?

(a) जयपुर अपने आभूषण व्यवसाय के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
(b) नाथद्वारा अपने स्वर्ण आभूषणों के लिए प्रसिद्ध है।
(c) महीन धातु तारों से बने आभूषणों को तारकशी कहा जाता है।
(d) अलवर थेवा कला के लिए प्रसिद्ध है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :

राजस्थान ⁠‌​​​‌​‌​‌‌‌​​​‌‌​‌‌⁠में आभूषण निर्माण के संबंध में निम्नलिखित तथ्यों पर विचार किया जा सकता है:

  • जयपुर को हस्तकलाओं का तीर्थ कहा जाता है और यह अपने आभूषण व्यवसाय के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसे राजस्थान की हस्तकलाओं का खजाना माना जाता है।
  • तारकशी एक ऐसी कला है जिसमें चांदी के महीन धातु तारों से आभूषणों का निर्माण किया जाता है।…
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Q.6 सुमेलित करें Animal Attendant 01 Dec 2024 (Shift- II),Animal Attendant - 2023

सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए-

सूची-I (गहने) सूची-II (पहनने का अंग)
a. थुस्सी i. अंगुली
b. बोरला ii. कान
c. दामना iii. गला
d. झाले iv. सिर

निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें-

राजस्थान ⁠‌​​‌​​​‌​​​‌‌‌‌​​​⁠की सांस्कृतिक परंपरा में आभूषणों को शरीर के विभिन्न अंगों पर धारण किया जाता है। थुस्सी (या ठूस्सी) गले में चिपका कर पहने जाने वाला एक प्रमुख आभूषण है, जिसे गालवटियां भी कहते हैं। बोरला सिर के मध्य भाग में पहना जाने वाला आभूषण है। दामना हाथ की अंगुली में पहना जाने वाला आभूषण है।…

Q.7 सुमेलित करें RPSC 2nd Grade Exam-28/10/2018,SR. TEACHER GR II 2018 A

निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए -

सूची-I सूची-II
(a) सिर (i) कणकती
(b) गला (ii) रमझोल
(c) कमर (iii) हंसली
(d) पैर (iv) मेमंद

राजस्थान ⁠‌​​‌‌​​‌‌‌‌‌​‌​‌​‌⁠की पारंपरिक वेशभूषा में आभूषणों का एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ प्रत्येक अंग के लिए विशिष्ट आभूषण निर्धारित हैं। मेमंद सिर का एक प्रमुख आभूषण है। हंसली गले में पहना जाने वाला एक ठोस आभूषण है, जो सोने या चांदी के मोटे तार को गोलाई में मोड़कर बनाया जाता है। कणकती कमर का आभूषण है, जिसे ‘तगड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है।…

Q.8 अभिकथन-कारण

नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है। इन कथनों का सावधानीपूर्वक परीक्षण कीजिए और नीचे दिए गए कूट (Codes) की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Assertion A: ‘कातरिया’ (Kaatariya) राजस्थान में महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली विशेष प्रकार की कांच की चूड़ियों को कहा जाता है।
Reason R: राजस्थानी समाज में कांच और लाख की चूड़ियों को सुहाग का प्रतीक माना जाता है और मांगलिक कार्यों में इनकी अनिवार्य उपस्थिति अनिवार्य है।

राजस्थान ⁠‌​​​‌‌​​‌‌‌‌​‌‌‌​‌​⁠की सांस्कृतिक शब्दावली में ‘कातरिया’ (Kaatariya) का प्रयोग विशेष रूप से कांच की चूड़ियों के लिए किया जाता है। राजस्थानी समाज और परंपराओं में महिलाओं के श्रृंगार में चूड़ियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कांच और लाख की चूड़ियों को सुहाग का प्रतीक माना जाता है, जिसके कारण विवाहित महिलाओं द्वारा इन्हें पहनना अनिवार्य समझा जाता है।…

Q.9 क्रम व्यवस्थित करें 3rd Grade-2010

महिलाओं के गहनों का सिर से पैर तक सही क्रम है -

राजस्थान ⁠‌‌​​​‌​​​​​‌​‌​​​​⁠की संस्कृति में महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले आभूषणों का ऊपर से नीचे (सिर से पैर) का क्रम उनके शारीरिक अंगों की स्थिति पर आधारित है। बोर या बोरला सिर का आभूषण है जिसे धागा बाँधकर मस्तिष्क पर स्थिर किया जाता है। टीडीभलको सोने की छोटी कुंडली के समान माथे पर पहना जाने वाला आभूषण है। बिंदिया ललाट के मध्य भाग में लगाई जाती है।…

Q.10 बहु-विकल्प

निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (आभूषण-अंग) सही नहीं है-
(A) पगपान - पैर की अँगुली
(B) जुगनी - कमर
(C) सिरमांग - सिर
(D) कांकणी - हाथ की अंगुली

राजस्थान ⁠‌‌​​​​‌‌​​‌​‌​‌‌‌⁠की समृद्ध संस्कृति में शरीर के विभिन्न अंगों के लिए विशिष्ट आभूषण निर्धारित हैं। दिए गए युग्मों में से जुगनी और कांकणी का मिलान गलत है। जुगनी मुख्य रूप से गले का आभूषण है, न कि कमर का। गले के अन्य प्रसिद्ध आभूषणों में हंसली, तिमणिया, चंपाकली, कंठी, मांदलिया, और तुलसी शामिल हैं।…

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