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राजस्थान कला संस्कृति

लोक गीत | लोक संगीत

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 VDO Mains Exam - 09.07.2022,JEN (यांत्रिकी) डिग्री परीक्षा-13.12.2020

हेला ख्याल लोक संगीत राजस्थान के क्षेत्रों से संबंधित है-

हेला ख्याल ⁠‌​‌‌​‌​​‌‌​​​⁠राजस्थान का एक लोकप्रिय लोक नाट्य और संगीत शैली है, जिसका मुख्य केंद्र दौसा (लालसोट) और सवाई माधोपुर जिले हैं। इस विधा के प्रवर्तक शायर हेला को माना जाता है। ‘हेला’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘हेला देना’ या आवाज देना होता है। इस ख्याल की शुरुआत ‘बम’ के साथ होती है।…

Q.2 Common Eligibility Test(Graduation Level) - 2024 - Master Question Paper B23

लोकप्रिय गीत ‘धरती धोरा री’ की रचना किसके द्वारा की गई-

लोकप्रिय ⁠‌‌​‌‌‌‌​‌‌​‌​⁠गीत ‘धरती धोरा री’ की रचना सुप्रसिद्ध साहित्यकार कन्हैया लाल सेठिया द्वारा की गई है। इनका जन्म सुजानगढ़ (चूरू) में हुआ था। यह गीत राजस्थान की रेतीली भूमि और उसकी गौरवशाली परंपराओं को समर्पित है। कन्हैया लाल सेठिया राजस्थानी भाषा के प्रति अगाध प्रेम के लिए जाने जाते हैं।…

Q.3 LDC Exam 2018

निम्नलिखित में से कौनसी गायकी लोकगायकी को श्रेणी में सम्मिलित नहीं है?

ध्रुपद ⁠‌‌​‌‌‌​‌​​​​​​​‌⁠भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन और गंभीर गायन शैली है, जिसे लोकगायकी की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। ध्रुपद गायन की शुरुआत राजा मानसिंह तोमर के समय हुई थी। यह शैली अपनी शुद्धता, अनुशासन और विशिष्ट नियमों के लिए जानी जाती है, जिसमें चार वाणियाँ — गोहरहारी, डागुरी, खण्डारी और नोहारी विकसित हुईं।…

Q.4 पुस्तकालयाध्यक्ष द्वितीय श्रेणी सीधी भर्ती परीक्षा - 2019

घूघरी, केवड़ा आदि लोकगीत किस क्षेत्र से सम्बन्धित है

राजस्थान ⁠‌‌​‌‌‌​‌‌​​‌​‌‌​⁠के मरुस्थलीय क्षेत्र में लोकगीतों की एक अत्यंत समृद्ध परंपरा है, जहाँ घूघरी और केवड़ा जैसे गीत अपनी विशेष पहचान रखते हैं। मरुस्थलीय क्षेत्र के लोकगीतों की मुख्य विशेषता उनका ऊँचा स्वर और लंबी तान है। इस क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण लोकगीत निम्नलिखित हैं:…

Q.5 RPSC स्कूल व्याख्याता-2016, RPSC 2nd Grade SST (GK) 2011

‘केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ को अल्ला जिल्लाह बाई ने किस राग में गाया?

‘केसरिया ⁠‌‌‌‌‌​​‌​​‌​‌‌‌​⁠बालम आओ नी पधारो म्हारे देश’ को प्रसिद्ध मांड गायिका अल्ला जिल्लाह बाई ने मांड राग में गाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्रदान की। मांड राजस्थान की एक परिष्कृत लोक गायन शैली है, जिसका उद्भव जैसलमेर क्षेत्र (प्राचीन मांड प्रदेश) में हुआ था।…

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Q.6 पटवार परीक्षा-2011, पटवारी परीक्षा 2011

राजस्थान का वह संगीतज्ञ जिसके विषय में किवदंती है कि उसने एक राग से पत्थर को पिघला दिया था-

राजस्थान ⁠‌‌‌‌‌​​‌​​‌​‌‌‌‌⁠के संगीत इतिहास में हरिसिंह का नाम एक विशिष्ट संगीतज्ञ के रूप में उल्लेखित है। उनके विषय में यह प्रसिद्ध किवदंती प्रचलित है कि उन्होंने अपनी राग साधना के प्रभाव से एक पत्थर को पिघला दिया था। यह चमत्कारिक घटना उनके संगीत कौशल की पराकाष्ठा को प्रमाणित करती है।…

Q.7 कथन आधारित

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-

  1. होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा रसिया, होरी, धमाल आदि गीत गाये जाते हैं।

  2. व्यावसायिक जातियों द्वारा युद्ध के समय गाये जाने वाले वीर रसात्मक गीत सिन्धु और मारू रागों पर आधारित है।

उपरोक्त में से सत्य कथन/कथनों का चयन कीजिए-

राजस्थान ⁠‌‌​‌‌‌‌‌‌​​​​​​‌⁠में लोकगीतों की एक समृद्ध परंपरा है। होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा मुख्य रूप से धमाल, होरी, और रसिया जैसे गीत गाए जाते हैं, जो फाल्गुन मास के उल्लास और उमंग को दर्शाते हैं। रसिया गीत ब्रज क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं, जबकि शेखावाटी क्षेत्र में होली के समय चंग नृत्य के साथ धमाल गायन अत्यंत लोकप्रिय है।…

Q.8 कथन आधारित

अल्लाह जिलाई बाई के बारे में असत्य कथन है -

अल्लाह ⁠‌​​‌​‌‌‌‌‌‌‌​​‌‌‌​⁠जिलाई बाई राजस्थान की एक अत्यंत प्रतिष्ठित मांड गायिका थीं, जिनका जन्म बीकानेर में हुआ था। इन्होंने गायन की शिक्षा उस्ताद हुसैन बख्श से प्राप्त की। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह इनके संगीत से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्होंने अल्लाह जिलाई बाई को ‘बीकानेर म्यूजिकल स्कूल’ में भर्ती करवाया।…

Q.9 सुमेलित करें ARO (Agri. Che) - 24.11.2020

अधोलिखित को सुमेलित कीजिए ?

संगीत घराना कलाकार
अ. डागरा घराना 1. मोतीराम ज्योतिराम
ब. जयपुर घराना 2. बहराम खां
स. मेवाती घराना 3. मनरंग
द. अतरौली घराना 4. दुल्लु खां

कूट:
अ ब स द

राजस्थान ⁠‌​‌​​​‌​​​​​‌​​‌‌⁠के विभिन्न शास्त्रीय संगीत घरानों और उनके कलाकारों का सही सुमेलित रूप इस प्रकार है:

  • डागरा घराना: बहराम खां (रामसिंह के दरबारी गायक)।
  • जयपुर घराना: मनरंग भूपत खां।
  • मेवाती घराना: मोतीराम-ज्योतिराम (मोती-ज्योति)।
  • अतरौली घराना: दुल्लू खां।…

Q.10 बहु-विकल्प

निम्न में से पर्वतीय गीत है -

नोखीला

माच्छर

पटेल्या

रसिया

कूट-

राजस्थान ⁠‌‌​‌‌‌‌​​‌​‌​​​‌⁠के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित लोकगीतों की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। इन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों द्वारा गाए जाने वाले गीतों में पटेल्या, लालार, माच्छर और नोखीला अत्यंत प्रसिद्ध हैं। ये गीत पर्वतीय जीवन की झलक प्रस्तुत करते हैं।

  • पटेल्या (Patelya): यह पर्वतीय क्षेत्र का प्रमुख लोकगीत है।…
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