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राजस्थान कला संस्कृति

सांस्कृतिक रीति-रिवाज एवं कुप्रथाएं (लोक विश्वास), खान-पान

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 RPSC III Grade Teacher Exam-2006

राजस्थानी संस्कृति में ‘बिनोटा’ का क्या अर्थ है?

राजस्थानी ⁠‌​‌‌‌​‌​​​‌​⁠संस्कृति में विवाह के अवसर पर दूल्हा और दुल्हन की जूतियों को ‘बिनोटा’ कहा जाता है। ये जूतियाँ सामान्य जूतियों से भिन्न होती हैं क्योंकि इन्हें विशेष रूप से वैवाहिक समारोह के लिए तैयार किया जाता है। बिनोटा के निर्माण में मुख्य रूप से चमड़े का उपयोग होता है, जिस पर कसीदाकारी का बारीक काम किया जाता है।…

Q.2 Gram Sevak, Hostal Warden-2016

निम्नलिखित में से ‘छेड़ा फाड़ना’ क्या है-

राजस्थान ⁠‌‌‌‌‌​​​‌​‌​⁠की जनजातियों, विशेष रूप से भील और मीणा समुदायों में प्रचलित ‘छेड़ा फाड़ना’ प्रथा का सीधा संबंध तलाक (Divorce) से है। यह एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से पति-पत्नी का वैवाहिक संबंध समाप्त होता है।…

Q.3 C.I.D. Exam, 2002, C.I.D. Exam-2002

कंजर जनजाति द्वारा ‘हाकम राजा का प्याला’ पीकर किस बात की कसम खाई जाती है-

कंजर ⁠‌‌‌‌‌​​‌​‌​​⁠जनजाति राजस्थान की एक प्रमुख जनजाति है, जो मुख्य रूप से हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, झालावाड़) में निवास करती है। इस जनजाति में हाकम राजा का प्याला पीकर सत्य बोलने की परंपरा है; यह माना जाता है कि इस प्याले को पीने के बाद इस जनजाति का व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलता। कंजर समाज में चौथ माता और हनुमान जी को आराध्य के रूप में पूजा जाता है।…

Q.4 Lect. Ayurveda Shalyu-2021

जयपुर राज्य में कन्या वध को किस वर्ष गैर कानूनी घोषित कर दिया?

जयपुर ⁠‌​​​‌​‌​‌​‌‌​‌​‌⁠रियासत में कन्या वध को 1844 ईस्वी में गैर-कानूनी घोषित किया गया था। इस समय जयपुर के महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय अल्पवयस्क थे, इसलिए प्रारंभ में शासन पर मेजर लुडलो का नियंत्रण रहा। लुडलो ने ही जयपुर में कन्या वध, समाधि प्रथा और मानव क्रय-विक्रय पर रोक लगाई।…

Q.5 तृतीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा - 2022

निम्न में से विवाह के लिए राजस्थान का सबसे महत्त्वपूर्ण अबूझ सावा कौनसा है?

आखा तीज ⁠‌‌‌​‌​‌​​‌‌​‌​‌‌⁠जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है, प्रतिवर्ष वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। राजस्थान में इसे विवाह का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा ‘अबूझ सावा’ माना जाता है। ‘अबूझ सावा’ का अर्थ है ऐसा दिन जिसमें विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों के लिए किसी ज्योतिषी से पंचांग देखे बिना शुभ मुहूर्त माना जाता है।…

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Q.6 कारापाल परीक्षा-2012

“गौना” किससे संबंधित हैं?

गौना ⁠‌‌‌‌​‌‌‌‌​​‌​​‌​⁠राजस्थान की संस्कृति में विवाह से संबंधित एक प्रमुख रस्म है, जिसे मुकलावा या गौना आणा भी कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, यदि वधू अल्पवयस्क हो, तो विवाह के कुछ समय बाद उसे वयस्क होने पर ससुराल भेजने की प्रक्रिया गौना या मुकलावा कहलाती है। यह रस्म वधू के अपने पति के घर में स्थायी निवास की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।…

Q.7 कथन आधारित

कथन 1. ऊझणो - वधु के पिता के द्वारा वर पक्ष को दी जाने वाली सामग्री।
कथन 2. जुआ-जुई - विवाह के बाद वर वधु द्वारा खेला जाने वाला खेल।

उपयुक्त में से सही कथन का चयन कीजिए-

कथन ⁠‌‌​​​​‌‌​​‌‌​​‌​​⁠1 के अनुसार, ऊझण (ओझण) वधु पक्ष द्वारा वर पक्ष को दी जाने वाली राशि एवं उपहार सामग्री है। यह रस्म विवाह के समय वधु के पिता या परिवार द्वारा संपन्न की जाती है। कथन 2 में उल्लेखित जुआ-जुई की रस्म विवाह के अगले दिन दोपहर को आयोजित की जाती है। इसमें एक बर्तन में जल और दूध भरकर वर-वधु के सामने रखा जाता है और उसमें अंगूठी या पैसा डाल दिया जाता है।…

Q.8 कथन आधारित

निम्न में से असत्य कथन है-

राजस्थानी ⁠‌​​‌‌​​‌​‌​‌‌​‌‌‌‌⁠ग्रामीण और कृषि परिवेश में दैनिक भोजन के समय और संबंधित वस्तुओं के लिए विशिष्ट शब्दावली प्रचलित है। कृषकों द्वारा सुबह के समय किए जाने वाले नाश्ते को सिरावण कहा जाता है। दोपहर के समय खेत पर किए जाने वाले भोजन को भाता के नाम से जाना जाता है, जिसे प्रायः घर की महिलाएँ खेत तक पहुँचाती हैं।…

Q.9 सुमेलित करें

सुमेलित कीजिए-

प्रथा सर्वप्रथम रोक लगाने वाले शासक
(A) डाकण प्रथा (1) महाराणा स्वरूप सिंह
(B) कन्या वध (2) महाराव रामसिंह द्वितीय
(C) समाधि प्रथा (3) रामसिंह द्वितीय
(D) त्याग प्रथा (4) महाराजा मानसिंह

राजस्थान ⁠‌‌​​​​‌​‌‌‌​‌‌‌​‌⁠की विभिन्न रियासतों में कुप्रथाओं के उन्मूलन के लिए शासकों द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे। इनके संबंध में मुख्य ऐतिहासिक तथ्य निम्नलिखित हैं:

  • डाकण प्रथा: मेवाड़ रियासत में 1853 में महाराणा स्वरूप सिंह के शासनकाल के दौरान इस प्रथा पर रोक लगाई गई।…

Q.10 बहु-विकल्प

निम्नलिखित में से सही सुमेलित है -
1. बरी-पड़ला - वर पक्ष विवाह के अवसर पर वधू के लिए श्रृंगारिक सामान गहने एवं कपड़े लाता है।
2. रीत - विवाह निश्चित होने पर लड़के वालों की तरफ से लड़की को भेजे जाने वाले उपहार।
3. जांनोटण -वरपक्ष की ओर से दिया जाने वाला भोज।
4. सावो - विवाह के लिए लड़का और लड़की को रोकने की रस्म।

राजस्थानी ⁠‌‌​​​​‌‌​​​‌‌​​‌​⁠संस्कृति में विवाह से जुड़ी रस्में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। रीत विवाह निश्चित होने पर लड़के वालों की तरफ से लड़की को भेजे जाने वाले उपहारों को कहा जाता है। बरी-पड़ला वह रस्म है जिसमें वर पक्ष विवाह के अवसर पर वधू के लिए श्रृंगारिक सामान, गहने एवं कपड़े लाता है। जांनोटण वर पक्ष की ओर से दिया जाने वाला भोज है।…

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