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राजस्थान कला संस्कृति

लोक संत और संप्रदाय

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 जेल प्रहरी परीक्षा - 12.09.2017

विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जंभेश्वर से संबंधित मुख्य स्थान है-

विश्नोई ⁠‌​​‌‌​‌​‌‌​‌⁠संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु जंभेश्वर (जाम्भोजी) से संबंधित मुख्य स्थान मुकाम (मुकाम तालवा) है, जो बीकानेर जिले की नोखा तहसील में स्थित है। यह इस संप्रदाय की मुख्य पीठ और गुरु जंभेश्वर का समाधि स्थल है। यहाँ प्रतिवर्ष आश्विन और फाल्गुन अमावस्या पर मेले लगते हैं।…

Q.2 JEN Exam-2020,Lab Assistant Ist Paper Exam 29.06.2022,EO&RO Exam-14.05.2023,EO/RO Exam-14.05.2023,Fourth Class Employee - 2025

निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक थे-

निरंजनी ⁠‌​​‌‌​‌‌​‌‌‌⁠संप्रदाय के प्रवर्तक संत हरिदास जी थे। इनका जन्म 1455 ई. में डीडवाना के कापड़ोद गाँव में हुआ था और इनका मूल नाम हरिसिंह सांखला था। प्रारंभिक जीवन में वे उदरपूर्ति हेतु डाके डालते थे, किन्तु एक महात्मा के उपदेश से प्रभावित होकर उन्होंने साधु जीवन धारण कर लिया, जिस कारण उन्हें ‘कलयुग का वाल्मीकि’ भी कहा जाता है।…

Q.3 तृतीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा - 2025

निम्नलिखित में से किसे राजस्थान के कबीर के नाम से जाना जाता है?

संत ⁠‌​​​​‌​​​​‌​‌⁠दादू दयाल (1544-1603 ई.) को ‘राजस्थान का कबीर’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों समुदायों में व्याप्त धार्मिक अंधविश्वासों का खंडन किया और समाज में समानता का संदेश दिया। इस प्रश्न से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:…

Q.4 RPSC 2nd Grade 24 Dec.- 2022 Cancelled Exam

अग्नि नृत्य करने वाला धार्मिक संप्रदाय कौन सा है-

अग्नि ⁠‌​‌‌​‌​​‌​​​‌⁠नृत्य राजस्थान के सुप्रसिद्ध लोक नृत्यों में से एक है, जिसका उद्गम बीकानेर जिले के कतियासर ग्राम में हुआ है। यह नृत्य विशेष रूप से जसनाथी संप्रदाय के सिद्ध लोगों द्वारा किया जाता है। इस संप्रदाय की स्थापना संत जसनाथ जी ने की थी, जिन्होंने अनुयायियों के लिए कुल 36 नियमों का प्रतिपादन किया था।…

Q.5 कथन आधारित Rajasthan CET (Graduation Level), Common Eligibility Test(Graduation Level) - 2024 - Master Question Paper B23

नीचे दो कथन दिए गए हैं :
कथन (I) : दादूदयाल (राजस्थान के कबीर) का जन्म अलवर के धोलीदुब/दोलीदुब गाँव में 1542 AD में फाल्गुन शुक्ल नवमी को हुआ था।
कथन (II) : दादू ने सामान्य भाषा (साधुक्कडी) में ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष पर अपने उपदेश दिए।

उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें।

संत ⁠‌‌​​​​​‌​‌​‌‌​‌​‌⁠दादूदयाल का जन्म 1544 ईस्वी (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी) को अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ था। उन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ के नाम से जाना जाता है। कथन (I) में दिया गया धोलीदुब (अलवर) गाँव वास्तव में संत लालदास का जन्मस्थान है, जिनका जन्म 1540 ई. में हुआ था। अतः कथन (I) गलत है।…

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Q.6 कथन आधारित JEN (Diploma) Exam - 21.08.2016

संत जसनाथ जी के बारे में कौनसा कथन सही नहीं है?

संत ⁠‌​​​‌​‌​‌​​​‌​‌​‌‌⁠जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में बीकानेर के कतरियासर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम हमीर जी और माता का नाम रूपा दे था। जसनाथ जी ने आध्यात्मिक साधना हेतु 12 वर्षों तक तपस्या गोरखमालिया (बीकानेर) नामक स्थान पर की थी, न कि कतरियासर में। अतः विकल्प B गलत है।…

Q.7 सुमेलित करें College Lect. Exam - 30.05.2019

निम्न को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिए-

संत जन्म स्थान
(A) रामदास (i) डेहरा
(B) जसनाथ (ii) जैतारण
(C) दरियाव (iii) कतरियासर
(D) चरणदास (iv) बीकमकोर

संत ⁠‌​​‌‌​​‌​‌‌‌‌​​‌‌​⁠रामदास जी रामस्नेही संप्रदाय की खेड़ापा (जोधपुर) शाखा के प्रवर्तक थे। इनका जन्म विक्रम संवत 1783 में जोधपुर के बीकमकोर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम शादाल जी, माता का नाम अणमी और गुरु का नाम हरिरामदास जी था। संत जसनाथ जी ने जसनाथी संप्रदाय की स्थापना की, जिसका प्रमुख केंद्र बीकानेर का कतरियासर है।…

Q.8 अभिकथन-कारण Librarian Grade II - 2025, Librarian Gr. II (School Edu.) Comp. Exam. 2024

कथन (अ) - लालदासी संतों के लिए भिक्षावृत्ति हेय समझी जाती है।
कारण (र) - वे अपनी आजीविका परिश्रम से कमाते हैं।

लालदासी संप्रदाय ⁠‌​​​‌‌​​‌‌​‌‌​‌‌‌‌⁠के प्रवर्तक संत लालदास जी (जन्म: धौलीदूव, अलवर) थे। इस संप्रदाय की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें पुरुषार्थ (परिश्रम) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। संत लालदास जी स्वयं मेव जाति के लकड़हारे थे और मेहनत से अपनी आजीविका कमाते थे।…

Q.9 क्रम व्यवस्थित करें

घटनाओं को कालानुक्रम में लगाइए-
1. गदन चिश्ती से दीक्षा
2. सिंह शिला पहाड़ पर कुटिया निर्माण
3. चेतावनियों की रचना
4. लालदासजी का निधन
विकल्प-

लालदासी ⁠‌‌​​​​​‌‌‌‌‌​​​‌‌​⁠सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालदासजी का जन्म 1540 ई. में अलवर के धौलीदूव गाँव में हुआ था। उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं का कालानुक्रमिक विवरण निम्नलिखित है:

  • गदन चिश्ती से दीक्षा: लालदासजी के गुरु का नाम गदन चिश्ती था, जिनसे उन्होंने दीक्षा प्राप्त की। यह उनके आध्यात्मिक मार्ग का महत्वपूर्ण चरण था।…

Q.10 बहु-विकल्प

संत हरिदास द्वारा लिखित वाणी से संबंधित ग्रंथ कौन-से हैं?
1. मंत्र राजप्रकाश
2. हरिपुरुष की वाणी
3. परचितन रत्नाकर
4. निरंजन सागर
सही विकल्प चुनें:

संत ⁠‌‌​​​​​‌‌‌‌‌​​‌​​​⁠हरिदास जी निरंजनी संप्रदाय के प्रवर्तक थे, जिनका जन्म कापड़ोद (डीडवाणा) में 1455 ई. में हुआ था। इनका मूल नाम हरिसिंह सांखला था और इन्हें ‘कलियुग का वाल्मीकि’ कहा जाता है। इनके आध्यात्मिक विचारों और उपदेशों का संग्रह मुख्य रूप से मंत्र राजप्रकाश और हरिपुरुष की वाणी नामक ग्रंथों में प्राप्त होता है।…

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