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राजस्थान इतिहास

चौहान राजवंश

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 जेल प्रहरी- 2017,II Grade (Science) Exam. 2011,Jail Prahari 29 Aug. 2017,जेल प्रहरी-2017

तराईन का द्वितीय युद्ध लड़ा गया-

तराईन ⁠‌​​‌​‌​‌‌‌​​⁠का द्वितीय युद्ध 1192 ई. में मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान तृतीय के मध्य लड़ा गया था। यह युद्ध आधुनिक हरियाणा के करनाल में स्थित तराईन के मैदान में हुआ था।…

Q.2 Sr. Teacher Grade - II 2022 (Sanskrit edu.) Set B

अजमेर नगर की स्थापना के पहले अजमेर के चौहानों की राजधानी कौन-सी थी-

अजमेर ⁠‌​​‌​‌​‌‌‌‌​⁠के चौहान राजवंश की नींव सपादलक्ष क्षेत्र में पड़ी थी, जिसे शाकम्भरी (सांभर) के नाम से भी जाना जाता है। इस वंश की स्थापना का श्रेय वासुदेव चौहान को दिया जाता है, जिन्होंने 551 ईस्वी में इस साम्राज्य की शुरुआत की थी।…

Q.3 Sr. Teacher Grade - II 2018 Group A

नाटक ‘ललित विग्रह राज’ की रचना की गई-

नाटक ⁠‌​​‌​‌​‌‌‌‌‌⁠‘ललित विग्रहराज’ की रचना अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (जिन्हें बीसलदेव के नाम से भी जाना जाता है) के दरबारी विद्वान सोमदेव (सोमेन्द्र) द्वारा की गई थी। यह एक संस्कृत नाटक है जिसमें विग्रहराज चतुर्थ और राजकुमारी देसलदेवी की प्रेम कहानी का वर्णन है। इसमें गजनी के शासक खुशरुशाह की पराजय का भी उल्लेख मिलता है।…

Q.4 जेल प्रहरी परीक्षा-2017,जेल प्रहरी-2017

अजयराज के वंशज विग्रहराज चतुर्थ द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक का नाम है-

शाकंभरी ⁠‌​​‌​‌‌​​​​​⁠के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव), जिन्हें अजयराज का वंशज माना जाता है, एक महान विजेता होने के साथ-साथ विद्वान और कवियों के आश्रयदाता थे। उन्होंने संस्कृत भाषा में ‘हरिकेलि’ नामक एक प्रसिद्ध नाटक की रचना की थी। यह नाटक भारवि के ‘किरातार्जुनीयम्’ पर आधारित है।…

Q.5 कथन आधारित वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा - 2025, 2nd Grade 2024 Paper I Set B

निम्नलिखित कथनों को पढ़िये एवं नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प का चयन कीजिए :

A. विग्रहराज चतुर्थ शैव मतावलम्बी था।
B. पृथ्वीराज विजय के अनुसार, विग्रहराज चतुर्थ ने ‘एकादशी’ के दिन पशुवध पर प्रतिबन्ध लगाया था।

कूट :

चौहान ⁠‌​​​‌‌​​​‌‌​​‌​‌​​⁠शासक विग्रहराज चतुर्थ (1158-1163 ई.), जिन्हें बीसलदेव भी कहा जाता है, व्यक्तिगत रूप से शैव मतावलम्बी थे। उनकी शिव के प्रति आस्था का प्रमाण उनके द्वारा रचित संस्कृत नाटक ‘हरकेलि’ है, जिसमें भगवान शिव और अर्जुन के मध्य संवाद का वर्णन है। इसके अतिरिक्त, उनके समय में धार्मिक सहिष्णुता विद्यमान थी।…

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Q.6 कथन आधारित स्टेनोप्राफर-2013, स्टेनोग्राफर - 2013

निम्नांकित में से कौन सा कथन शाकम्भरी के चौहानों के विषय में असत्य है?

शाकम्भरी ⁠‌​‌​​‌​‌​‌‌​​‌‌‌​​⁠के चौहानों के विषय में दिए गए कथनों का विश्लेषण इस प्रकार है:

  • आरम्भ में वे प्रतिहारों के सामन्त थे: यह कथन सत्य है। चौहानों ने शुरुआत में गुर्जर-प्रतिहारों के सामन्त के रूप में शासन किया था।
  • गूवक उनका प्रथम स्वतंत्र शासक माना जाता है: यह कथन भी सत्य है। गूवक प्रथम को चौहान वंश का पहला स्वतंत्र राजा माना जाता है।…

Q.7 सुमेलित करें

चौहानों की उत्पत्ति के संबंध में निम्न को सुमेलित कीजिए-

  सूची-1   सूची-2
(1) अग्निकुंड से a. चंद्रबरदाई की पुस्तक पृथ्वीराज रासो
(2) सूर्यवंशी b. जेम्स टॉड
(3) चंद्रवंशी c. गौरीशंकर हीराचंद ओझा
(4) विदेशी d. पृथ्वीराज द्वितीय का हांसी अभिलेख

चौहानों ⁠‌‌‌​​‌​​‌​‌‌‌‌⁠की उत्पत्ति के संबंध में इतिहासकारों और प्राचीन लेखों के विभिन्न मतों का विवरण इस प्रकार है:

  • अग्निकुंड से उत्पत्ति: चंद्रबरदाई की पुस्तक ‘पृथ्वीराज रासो’ के अनुसार, मुनि वशिष्ठ ने आबू पर्वत पर यज्ञ किया था जिससे चार राजपूत जातियाँ (प्रतिहार, परमार, चालुक्य और चौहान) उत्पन्न हुईं।…

Q.8 अभिकथन-कारण

दिल्ली शिवालिक स्तम्भ लेख’ में विग्रहराज चतुर्थ द्वारा ‘तुर्कों को आर्यावर्त से पूर्ण रूप से बाहर करने’ का उल्लेख है। यह दावा तराइन के द्वितीय युद्ध के परिणाम के आलोक में कितना विश्वसनीय है और यह विग्रहराज के शासनकाल की क्या सीमाएं दर्शाता है?

विग्रहराज ⁠‌​‌‌‌‌​‌‌‌‌‌​​​‌‌⁠चतुर्थ (बीसलदेव) का शासनकाल (1158-1163 ई.) चौहानों का ‘स्वर्णयुग’ माना जाता है। दिल्ली शिवालिक स्तम्भ लेख में उल्लेख है कि उन्होंने आर्यावर्त से मुसलमानों को समाप्त कर दिया है। विग्रहराज ने खुशरुशाह को परास्त किया और दिल्ली के तोमर (तंवर) राजा को हराकर दिल्ली पर अधिकार करने वाले प्रथम चौहान शासक बने।…

Q.9 क्रम व्यवस्थित करें SI Exam,PSI 2016,07 Oct. 2018

चौहान राजवंश के निम्नलिखित शासकों का कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए -
1. पृथ्वीराज-तृतीय
2. अजयराज
3. अर्णोराज
4. विग्रहराज चतुर्थ

शाकम्भरी ⁠‌​‌‌‌‌‌‌​‌​​​‌‌‌⁠के चौहान शासकों का सही कालक्रम उनके शासनकाल के आधार पर निर्धारित किया जाता है। अजयराज इस सूची में सबसे पहले आते हैं, जिन्होंने अजमेर नगर की स्थापना की। उनके पश्चात उनके पुत्र अर्णोराज शासक बने। अर्णोराज के बाद विग्रहराज चतुर्थ (1158 - 1163 ई.) गद्दी पर बैठे, जिन्हें ‘बीसलदेव’ के नाम से भी जाना जाता है।…

Q.10 बहु-विकल्प

‘बिजौलिया अभिलेख’ में चौहानों को ‘विप्र श्री वत्स’ गौत्र का बताया गया है, जो उनकी ब्राह्मण उत्पत्ति का संकेत देता है। यदि यह सत्य है, तो राजपूत वंशों में ब्राह्मणों की उत्पत्ति का यह उदाहरण तत्कालीन वर्ण-व्यवस्था और सामाजिक गतिशीलता के संबंध में क्या महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है?

बिजौलिया अभिलेख (1170 ईस्वी) ⁠‌​‌‌‌‌​‌‌‌‌‌​​​​‌⁠चौहानों की वंशावली की जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस अभिलेख में चौहानों को ‘वत्स गोत्रीय ब्राह्मण’ बताया गया है, जो उनकी ब्राह्मण उत्पत्ति का संकेत देता है। यह साक्ष्य प्राचीन भारतीय समाज में सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility) के महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है।…

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