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राजस्थान इतिहास

राजस्थान इतिहास के प्रमुख स्रोत

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 SR. TEACHER GR II 2018 B

बिजोलिया अभिलेख किस वंश के इतिहास की जानकारी का महत्वपूर्ण साधन है?

बिजोलिया शिलालेख ⁠‌‌​​​‌‌​​​​​​‌⁠(1170 ईस्वी) भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया में पार्श्वनाथ मंदिर के पास उत्कीर्ण है। यह अभिलेख अजमेर और सांभर के चौहान वंश के इतिहास की जानकारी का एक महत्वपूर्ण साधन है। इस अभिलेख को चौहान शासक सोमेश्वर के काल में जैन श्रावक लोलाक द्वारा स्थापित करवाया गया था और इसके रचयिता गुणभद्र थे।…

Q.2 Lab Assistent (Science) -28.06.2022, Lab Assistant - 2022, Lab Assistant Science 2022 Paper 1 set A

घटियाला शिलालेख किस भाषा में लिखा गया था?

घटियाला शिलालेख ⁠‌‌​​​‌‌​​​​​‌‌⁠(861 ई.) जोधपुर में स्थित है। यह शिलालेख मुख्य रूप से संस्कृत भाषा में लिखा गया है, जिसमें गद्य और पद्य दोनों शैलियों का प्रयोग हुआ है। यह महत्वपूर्ण अभिलेख प्रतिहार शासक कक्कुुक के शासनकाल से संबंधित है और उनके बारे में ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करता है।

इस शिलालेख से जुड़े मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:…

Q.3 पटवारी परीक्षा-2011

बीजक डूंगरी पर सर्वप्रथम अशोक के शिलालेखों को किसने और कब खोजा?

बैराठ ⁠‌‌​‌​‌‌‌​​‌‌‌​‌⁠में स्थित बीजक की पहाड़ी (बीजक की डूंगरी) से मौर्य सम्राट अशोक के भाब्रू शिलालेख की खोज सर्वप्रथम 1837 में कैप्टन बर्ट द्वारा की गई थी। यह शिलालेख वर्तमान में कलकत्ता संग्रहालय में सुरक्षित है। इस शिलालेख में सम्राट अशोक को ‘मगध का राजा’ नाम से संबोधित किया गया है और इसके नीचे बुद्ध, धम्म एवं संघ अंकित है।…

Q.4 JEN 10-09-2022

चीरवा शिलालेख किस राजवंश के शासकों का उल्लेख करता है ?

चीरवा ⁠‌​‌​​‌‌​‌​‌​‌‌‌‌⁠का शिलालेख उदयपुर जिले के चीरवा गाँव के एक मंदिर के बाहरी द्वार पर स्थित है, जो 1273 ई. (विक्रम संवत 1330) का है। यह शिलालेख मुख्य रूप से मेवाड़ के गुहिल वंश के शासकों की वंशावली और उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है। इसमें विशेष रूप से गुहिलवंशीय बप्पा के वंशज पद्म सिंह, जैत्र सिंह, तेज सिंह और समर सिंह का वर्णन मिलता है।…

Q.5 प्रयोगशाला सहायक - 2019

कौन सा अभिलेख मंडोर के प्रतिहारों के इतिहास की जानकारी देता है ?

घटियाला अभिलेख ⁠‌​‌​​‌‌​‌​‌‌‌​​‌⁠(861 ई.) मण्डोर के प्रतिहारों के इतिहास की जानकारी देने वाला प्रमुख स्रोत है। यह अभिलेख प्रतिहार शासक कक्कु क द्वारा स्थापित कराया गया था। इसमें इस वंश के आदि पुरुष ब्राह्मण हरिश्चंद्र से लेकर कक्कु क तक की वंशावली और विवरण मिलता है।…

इस topic के 10 और सवाल

Q.6 कथन आधारित RPSC LDC Exam-2012, LDC - II

ख्यात के विषय में निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है?

ख्यात ⁠‌​​‌‌​​‌‌‌‌​​‌‌‌‌‌⁠शब्द संस्कृत के ‘ख्याति’ शब्द से व्युत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ यश या प्रसिद्धि होता है। मध्यकालीन राजस्थान में शासकों ने अपने राज्य और वंश के इतिहास को गौरवशाली बनाने के लिए ख्यात लेखन की परंपरा को राज्याश्रय प्रदान किया। ये ग्रंथ राजस्थान के इतिहास लेखन के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।…

Q.7 कथन आधारित Assistant Archivist-03.08.2024

‘दस्तूर कौमवार’ के विषय में निम्नांकित में से कौनसे तथ्य सही हैं-
1. इसमें जयपुर राज्य की सेवा करते हुए जिन्हें पद एवं इनाम प्राप्त हुए, उनका विवरण है।
2. इसमें जयपुर राज्य की आय-व्यय, भेंट, उपहार का विवरण है।
3. विभिन्न मोहल्लों में जो वस्तुएँ मिलती थीं उनका ब्यौरा है।
4. यह 32 जिल्दों में सुरक्षित है।

दस्तूर ⁠‌​‌​​‌​‌​​‌​​​‌​​​⁠कौमवार जयपुर रियासत के प्रशासनिक और सामाजिक इतिहास को जानने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह अभिलेखीय श्रृंखला कुल 32 जिल्दों में लिपिबद्ध है। इस दस्तावेज़ की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें सूचनाओं का वर्गीकरण जातिवार किया गया है, जिससे तत्कालीन सामाजिक संरचना का बोध होता है।…

Q.8 सुमेलित करें Patwar Exam- 24.10.2022, पटवार भर्ती परीक्षा-2021

सुमेलित कीजिए-

ग्रन्थ लेखक
(A) पृथ्वीराज रासो (i) विजयदान देथा
(B) वीर विनोद (ii) चन्दरबरदाई
(C) बातां री फुलवारी (iii) श्यामलदास

कूट:

ग्रन्थों ⁠‌​​‌‌​​‌‌‌​‌‌​​​‌‌⁠और उनके लेखकों का सही मिलान इस प्रकार है:

पृथ्वीराज रासो की रचना चन्दरबरदाई द्वारा की गई थी। इस ग्रंथ में अजमेर के चौहान शासकों तथा पृथ्वीराज चौहान तृतीय का विवरण मिलता है। इसमें उनकी वीरता और चार राजपूत वंशों की उत्पत्ति के बारे में भी जानकारी मिलती है। वीर विनोद के लेखक कविराज श्यामलदास थे।…

Q.9 अभिकथन-कारण QUESTION BOOKLET, तृतीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा - 2025

नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में;

अभिकथन A: नोह उत्खनन से प्राप्त सिक्के ने कुषाण सम्राट वासुदेव पर प्रकाश डाला है।
कारण R: सिक्के के आमुख भाग पर यूरोपियन शैली का लिबास पहने सम्राट को अग्नि के समक्ष अर्पण करते दिखाया गया है जबकि प्रतिमुख भाग पर माता पार्वती समझी जाने वाली एक आकृति दर्शाई गई है।

उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

भरतपुर ⁠‌​​‌​​‌‌​‌​​‌​​​​‌​⁠के नोह (Noh) पुरातात्विक स्थल से कुषाण शासकों के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जिनसे कुषाण सम्राट वासुदेव के बारे में जानकारी मिलती है। कुषाण काल में, विशेष रूप से वासुदेव के समय में, सिक्कों का उपयोग राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के साक्ष्य के रूप में किया जाता था।…

Q.10 क्रम व्यवस्थित करें कॉलेज व्याख्याता-2011

अधोलिखित अभिलेखों का सही कालक्रम चुनिए (आरोही क्रम)-
1. बिजोलिया अभिलेख 2. नेमिनाथ अभिलेख 3. घोसुंडी अभिलेख 4. बुचकला अभिलेख।

राजस्थान ⁠‌​‌​​‌‌​‌‌​‌‌‌​‌⁠के इतिहास को जानने हेतु प्रयुक्त अभिलेखों का सही कालक्रम उनके उत्कीर्णन समय के आधार पर निम्नानुसार है:

  • घोसुंडी अभिलेख (द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व): चित्तौड़गढ़ में स्थित यह अभिलेख राजस्थान में वैष्णव (भागवत) संप्रदाय का प्राचीनतम साक्ष्य है। यह ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में है, जो अश्वमेध यज्ञ संपन्न करने का उल्लेख करता है।…
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