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राजस्थान इतिहास

राजपूतों की उत्पत्ति | गुर्जर-प्रतिहार राजवंश

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 II Grade GK (संस्कृत शिक्षा) -17.02.2019, II Grade (Sanskrit Edu.) 17 Feb. 19

निम्न में से कौनसा शासक गोड़ (बंगाल) में भोज-प्रथम का समकालीन था-

गुर्जर-प्रतिहार ⁠‌​​‌​‌‌​​‌​‌⁠वंश के प्रतापी शासक मिहिर भोज (भोज प्रथम), जिनका शासनकाल 836 से 885 ई. के मध्य रहा, के समय बंगाल (गोड़) में पाल वंश का शासन था। बंगाल के पाल शासक देवपाल मिहिरभोज के प्रमुख समकालीन प्रतिद्वंद्वी थे। मिहिर भोज का संघर्ष पाल शासकों देवपाल व विग्रहपाल से हुआ।…

Q.2 द्वितीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा-01.05.2017,द्वितीय श्रेणी अध्यापक-2017,वरिष्ठ अध्यापक परीक्षा - 2016,Sr. Teacher Grade - II 2016 Group 2

निम्नांकित में से किस विदेशी यात्री ने गुर्जर-प्रतिहार राजवंश की सैन्य शक्ति एवं समृद्धि का उल्लेख किया है-

9वीं ⁠‌​​‌​‌‌​​‌‌​⁠शताब्दी (लगभग 851 ई.) में भारत आए अरब यात्री सुलेमान ने गुर्जर-प्रतिहार राजवंश की सैन्य शक्ति और राज्य की समृद्धि का विस्तृत विवरण दिया है। सुलेमान ने तत्कालीन शासक मिहिरभोज (भोज प्रथम) की शक्ति की प्रशंसा की।…

Q.3 II Grade GK -28.10.2018, RPSC-II Grade - 28 Oct. 2018, II Grade GK-28.10.2011

कन्नौज पर अधिकार हेतु चले त्रिपक्षीय युद्ध में राजपूताना के किस वंश के शासकों ने भाग लिया-

हर्षवर्धन ⁠‌​​‌​‌‌​‌​​​⁠की मृत्यु के बाद उत्तर भारत की राजनीतिक शक्ति के केंद्र कन्नौज पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए तीन प्रमुख शक्तियों - गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट के मध्य लगभग डेढ़ शताब्दी तक चलने वाले युद्ध को त्रिपक्षीय संघर्ष कहा जाता है। राजपूताना के गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासकों ने इस संघर्ष में भाग लिया।…

Q.4 II Grade (Hindi) Exam. 2011

ओसियां में महावीर स्वामी को समर्पित जैन मंदिर का निर्माण किस राजा के काल में हुआ-

ओसियां ⁠‌​​‌​‌‌​‌​‌​⁠(जोधपुर) के प्रसिद्ध महावीर स्वामी जैन मंदिर का निर्माण गुर्जर-प्रतिहार शासक वत्सराज के शासनकाल में हुआ था। यह मंदिर 8वीं शताब्दी की गुर्जर-प्रतिहार कला का प्रमुख केंद्र है और इसे महामारू शैली में निर्मित पश्चिमी राजस्थान का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है।…

Q.5 कथन आधारित 2nd Grade 2024 Paper I Set D

मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश के विषय में निम्न कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए -
(अ) घटियाला का शिलालेख मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश की जानकारी का प्रमुख स्रोत है।
(ब) यह शिलालेख प्रसिद्ध प्रतिहार शासक कक्कुुक ने उत्कीर्ण करवाया था।

मण्डोर ⁠‌​​‌​​​‌‌​​‌​‌​‌‌​⁠के गुर्जर प्रतिहार राजवंश के इतिहास को जानने के लिए 861 ईस्वी के घटियाला शिलालेख सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। ये शिलालेख प्रतिहार शासक कक्कुुक द्वारा स्थापित करवाए गए थे। इन शिलालेखों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

1.…

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Q.6 कथन आधारित

गुर्जर प्रतिहार कालीन अभिलेखों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सत्य कथन का चयन कीजिये -

11 (5)

  1. वराह लेख व पेहोवा अभिलेख की रचना मिहिर भोज के समय की गई थी।

  2. बालादित्य ने ग्वालियर प्रशस्ति की रचना संस्कृत भाषा में की थी।

  3. बारतो का संग्रहालय लेख में मिहिर भोज को आदिवराह कहा गया है।

मिहिर भोज (836-885 ई.) ⁠‌‌​‌‌​‌‌​‌​‌​‌‌‌⁠गुर्जर-प्रतिहार वंश के प्रतापी शासक थे। उनके शासनकाल के दौरान जारी किए गए वराह लेख और पेहोवा अभिलेख इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ग्वालियर प्रशस्ति में प्रतिहारों की वंशावली और मिहिर भोज की विजयों का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस प्रशस्ति की रचना कवि बालादित्य ने संस्कृत भाषा में की थी।…

Q.7 सुमेलित करें Revenue Officer Gr. II & Executive Officer Gr. IV Re-Exam - 2022

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये और नीचे दिए गए कूट का उपयोग करते हुए सही उत्तर का चयन कीजिए -

सूची-I (शासक) सूची-II (वंश)
(अ) बाउक (i) प्रतिहार
(ब) राव सीहा (ii) राठौड़
(स) बप्पा (iii) गुहिल
(द) वासुदेव (iv) चौहान

कूट -

राजस्थान ⁠‌​​‌​​‌‌​‌‌‌‌‌​‌​‌​⁠के ऐतिहासिक शासकों और उनके राजवंशों का सही सुमेलन निम्नलिखित है:

बाउक (प्रतिहार): बाउक मंडोर की प्रतिहार शाखा के शासक थे। प्रारंभ में मेवाड़ के गुहिल और चौहान, गुर्जर-प्रतिहारों के ही सामंत रहे थे।

राव सीहा (राठौड़): राव सीहा मारवाड़ के राठौड़ वंश के संस्थापक एवं आदि पुरुष थे।…

Q.8 अभिकथन-कारण

नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।अभिकथन (A) : हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में अनेक नए राजवंशों का उदय हुआ, जिन्हें सामूहिक रूप से राजपूत कहा गया।
कारण (R) : हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत में राजनीतिक एकता धीरे-धीरे समाप्त होने लगी और अनेक छोटे-छोटे राज्य आपस में संघर्षरत थे।

हर्षवर्धन ⁠‌​​‌​​​​​‌​‌‌​​​​​​⁠की मृत्यु (647 ई.) के बाद भारत की राजनीतिक एकता, जो पूर्व में स्थापित हुई थी, पुनः समाप्त होने लगी। उत्तर भारत में एक सशक्त केंद्रीय सत्ता के अभाव में अनेक छोटे-छोटे राज्य अस्तित्व में आए, जो निरंतर आपस में संघर्षरत थे। इन संघर्षों के परिणामस्वरूप जो नए राजवंश उभरे, उन्हें सामूहिक रूप से राजपूत कहा गया।…

Q.9 क्रम व्यवस्थित करें स्कूल व्याख्याता परीक्षा 2022 Set E, स्कूल व्याख्याता (Physical Edu.) 21.10.2022

मण्डोर शाखा के निम्नलिखित प्रतिहार शासकों पर विचार कीजिए -
(i) नागभट्ट I
(ii) रज्जिला
(iii) बाउका
(iv) टाटा

इन शासकों का सही कालानुक्रम है —

मण्डोर ⁠‌‌​​​‌‌‌​‌‌‌​‌‌‌⁠के प्रतिहार वंश की वंशावली हरिश्चन्द्र के पुत्र रज्जिल (ii) से शुरू होती है। रज्जिल के उत्तराधिकारी नरभट्ट का पुत्र नागभट्ट प्रथम (i) इस शाखा का एक प्रतापी शासक था। नागभट्ट प्रथम ने मण्डोर राज्य की सीमा का विस्तार किया और अपनी राजधानी मेड़ान्तक (मेड़ता) बनाई। नागभट्ट प्रथम के दो पुत्र हुए, जिनमें से एक तात (iv) (टाटा) था।…

Q.10 बहु-विकल्प

महिपाल प्रथम के शासनकाल की घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों का परीक्षण करें:
I. महिपाल प्रथम अपने सौतेले भाई भोज द्वितीय को पराजित कर कन्नौज के सिंहासन पर बैठा।
II. राष्ट्रकूट नरेश इन्द्र तृतीय ने महिपाल के समय कन्नौज पर आक्रमण कर नगर को भारी क्षति पहुँचाई।
III. 915 ई. में भारत आए बगदाद निवासी अरब यात्री ‘अल मसूदी’ ने महिपाल प्रथम को ‘बल्हर’ कहकर संबोधित किया है।उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

गुर्जर-प्रतिहार ⁠‌​​​‌‌‌‌‌‌​​‌​‌‌​⁠शासक महिपाल प्रथम (914 - 943 ई.) ने अपने सौतेले भाई भोज द्वितीय को पराजित कर कन्नौज के सिंहासन पर अधिकार किया था। महिपाल के शासनकाल में राष्ट्रकूटों के साथ संघर्ष हुआ। राष्ट्रकूट शासक इन्द्र III ने महिपाल को पराजित किया और कन्नौज पर आक्रमण कर नगर को भारी क्षति पहुँचाई। इस आक्रमण के बाद ही प्रतिहारों का पतन शुरू हुआ।…

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