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राजस्थान इतिहास

मध्यकालीन प्रशासनिक-राजस्व व्यवस्था

10 प्रश्न, सही उत्तर और solution के साथ

Q.1 RAS-2001

‘ईजारा’ जाना जाता है-

‘ईजारा’ ⁠‌‌​‌‌​​​​‌‌‌‌‌⁠मध्यकालीन राजस्थान में प्रचलित राजस्व वसूली की एक प्रमुख ठेका प्रणाली थी। इसके अन्तर्गत एक निश्चित क्षेत्र से कर वसूल करने का अधिकार (ठेका) उच्चतम राजस्व की बोली लगाने वाले को एक निश्चित अवधि के लिए दिया जाता था। इस अनुबंध को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को ‘ईजारेदार’ के नाम से जाना जाता था।…

Q.2 RPSC Research Scholar Exam - 04.08.2024

इनमें से कौनसी मध्यकालीन शब्दावली सुमेलित नहीं है-

मध्यकालीन ⁠‌​​‌‌​​​​​‌​‌​​‌​⁠प्रशासनिक शब्दावली में मुकद्दम (Muqaddam) गाँव के मुखिया को कहा जाता था। इसका मुख्य कार्य ग्रामीण स्तर पर भू-राजस्व की वसूली और शांति व्यवस्था बनाए रखना था। यह राजस्व विभाग का लिपिक नहीं था। मध्यकालीन भारत में शिकदार नगर प्रशासन और सैन्य व्यवस्था को देखता था, जो परगने में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार था।…

Q.3 Research Officer 04 Aug 2024

भाईबंद अथवा भयाद की परम्परा का संबंध निम्न में से किससे है-

राजस्थान ⁠‌​​‌‌​​​​​‌​‌​‌​​⁠की मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रणाली का स्वरूप रक्त संबंधों और कुलीय भावना पर आधारित था। इस व्यवस्था के अंतर्गत शासक और सामंतों के बीच संबंध स्वामी और सेवक के न होकर भाईचारे के होते थे, जिसे भाईबंद अथवा भयाद की परंपरा कहा जाता था।…

Q.4 Archivist 03 Aug 2024, RPSC Archivist Exam - 03.08.2024

‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ में कितने परगनों का विवरण है?

‘मारवाड़ ⁠‌​​‌‌​‌​‌‌​‌​​‌​‌‌⁠रा परगना री विगत’ मध्यकालीन राजस्थान के इतिहास लेखन की एक अद्वितीय कृति है, जिसकी रचना जोधपुर के शासक महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के दरबारी कवि एवं देश दीवान मुहणोत नैणसी ने की थी। इसे इसकी विस्तृत सूचनात्मक सामग्री के कारण ‘मारवाड़ का गजेटियर’ कहा जाता है। इस ग्रंथ में तत्कालीन मारवाड़ राज्य के 7 परगनों का विवरण प्रस्तुत किया गया है।…

Q.5 जेल प्रहरी परीक्षा 21-10-2018, Shift -I, जेल प्रहरी-21-10-2018

किस अवधि में जोधपुर राज्य का शासन खालसा रहा?

जोधपुर ⁠‌​‌​​‌​​‌‌‌​​‌​​‌‌⁠के शासक राव चंद्रसेन की मृत्यु के बाद मुगल सम्राट अकबर ने जोधपुर को सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया, जिसे खालसा शासन कहा जाता है। राव चंद्रसेन की मृत्यु के बाद अकबर ने जोधपुर को 1581 ई. से 1583 ई. के मध्य खालसा घोषित कर दिया था।…

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Q.6 JEN Degree (TSP) Exam - 16.10.2016

मुगल सम्राट की आज्ञानुसार राजपूताना में शाही पदाधिकारियों द्वारा जारी किये जाने वाले कागजात कहलाते थे-

मुगल ⁠‌​‌​​‌​​‌‌‌​‌‌​‌‌​⁠काल के दौरान हस्बुल हुक्म एक महत्वपूर्ण दस्तावेज था। इसके तहत शाही परिवार के किसी सदस्य अथवा सरदार (शाही पदाधिकारी) द्वारा आदेश प्रेषित किया जाता था जिसमें किसी व्यक्ति को कोई स्वीकृति दी जाती थी तथा जिसमें बादशाह की सहमति होती थी।

राजपूताना और मुगल संबंधों के संदर्भ में विभिन्न पत्र-व्यवहारों का वर्गीकरण इस प्रकार है:…

Q.7 JEN Diploma (TSP)- 16.10.2016

बालद क्या थे-

मध्यकालीन ⁠‌​‌​​‌​​‌‌‌​‌‌​‌‌‌⁠राजस्थान में बालद का तात्पर्य व्यापारियों के उस कारवां से था, जो मुख्य रूप से बैलों के माध्यम से माल का परिवहन करते थे। इन्हें सार्थवाह भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है वह व्यक्ति या समूह जो व्यापारिक काफिले का नेतृत्व करता है। राजस्थान में विशेष रूप से इन समूहों द्वारा संचालित कारवांओं को ‘बालद’ के नाम से जाना जाता था।…

Q.8 कथन आधारित College Lec. (Sans. Edu.) History II, 12 Sep 2024

राजस्थान में जागीर व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
(A) राजस्थान में पचपन प्रकार की जागीर थी।
(B) गुजारा, उदक, सलामी, हजूरी आदि जागीर के प्रकार थे।
(C) जागीरों के अनुदान से रियासतों में परजीवियों का एक वर्ग तैयार हो गया।
उपर्युक्त में से कौनसा/से कथन सही है/हैं?

राजस्थान ⁠‌​‌​​‌‌​​‌​‌​​‌‌​‌⁠की जागीरदारी व्यवस्था एक सामंती ढांचा थी, जिसमें शासक द्वारा अपने सामंतों, संबंधियों और सेवकों को विभिन्न श्रेणियों में भूमि आवंटित की जाती थी। जागीर भूमि के प्रमुख प्रकारों में गुजारा, उदक, सलामी, और हजूरी आदि शामिल थे। उदक (या सासण) धार्मिक संस्थाओं और विद्वानों को दान स्वरूप दी गई कर-मुक्त भूमि थी।…

Q.9 कथन आधारित Revenue Officer Gr. II & Executive Officer Gr. IV Re-Exam - 2022

  1. मध्यकालीन राजस्थान के भूमि एवं राजस्व व्यवस्था के संबंध में निम्न में से कौनसा/से कथन सत्य है/हैं? (अ) उपजाऊ भूमि ‘माल’ व पहाड़ी भूमि ‘मगरा’ कहलाती थी। (ब) सर्दी में पैदा फसल ‘सियालू’ व गर्मियों में पैदा होने वाली फसल ‘उनालू’ कहलाती थीं। (स) उपज पर कर का निर्धारण ‘लाटा एवं कूंत’ प्रणाली से होता था।

मध्यकालीन ⁠‌​​‌​​‌‌​‌‌‌‌‌​​‌‌‌⁠राजस्थान में भूमि का वर्गीकरण उसकी उत्पादकता और भौगोलिक स्थिति के आधार पर किया जाता था। काली उपजाऊ भूमि को ‘माल’ कहा जाता था। इसी प्रकार, पहाड़ी क्षेत्र की भूमि को ‘मगरा’ के नाम से जाना जाता था।…

Q.10 सुमेलित करें

निम्न को सुमेलित कीजिए-

(1) शिकदार a. नगर प्रशासन देखता है।
(2) खानसामा b. राज ज्योतिषी होता है।
(3) वकील c. राजधानी के ठिकाने का प्रतिनिधि होता है।
(4) नैमेत्तिक d. राजकीय महल की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।

मध्यकालीन ⁠‌‌‌​​‌​‌​​​‌‌​⁠राजस्थान में प्रशासनिक पदों का विभाजन कार्यों के आधार पर किया गया था। शिकदार नगर प्रशासन को देखता था तथा सैन्य कर्मचारियों के खर्चों की जाँच करता था। खानसामा एक प्रभावशाली अधिकारी था जो राजकीय महल की आवश्यकताओं की पूर्ति करता था और इसका सीधा संबंध राज्य के कारखानों से होता था।…

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